शुक्रवार, 19 सितंबर 2025

नफरत की सियासत, मुद्दों पर क्यों नहीं बात

जितेन्द्र बच्चन



अक्टूबर-नवंबर में बिहार के विधानसभा चुनाव होने हैं। उसके बाद 2026 में तमिलनाडु व पश्चिम बंगाल में चुनावी रणभेरी बजेगी। बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार है। जबकि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और तमिलनाडु में डीएमके की सरकार है। इन तीनों राज्यों में चुनावी आहट होते ही नेताओं के सुर बदल चुके हैं। कल तक जिस पार्टी या दल के मुखिया विकसित प्रदेश, सशक्त भारत, संस्कृति और संस्कार की बात करते नहीं थकते थे, आज वही धर्म और जाति का जहर उगल रहे हैं। वोट बैंक सुरक्षित करने के चक्कर में सारा दृष्टिकोण हिंदू-मुस्लिम पर आकर टिक गया है। मां, बहन और बेटियों तक को गाली दी जा रही है। इतनी गंदी सियासत! जरा सोचिए, इस फिजा में जीतकर सत्ता तक पहुंचने वाले हमारा क्या भला करेंगे? आरोप-प्रत्यरोप के रण में कोई किसी से कम नहीं रहना चाहता। हर नेता खुद को दूध का धुला तो बताता है पर उसकी जुबान काबू में नहीं रहती

कहां हम तरक्की पसंद भारत को विश्व गुरु होने का डंका पीट रहे थे और कहां सत्ता के लिए नफरत की बिसात बिछाने से बाज नहीं आ रहे हैं। आप किसी भी जाति धर्म को हों, अगर इन्हें वोट देते हैं तो बहुत अच्छा, वरना एक मिनट में ये आपको ‘नमक हराम’ बता देंगे! ऐसा लगता है कि इन्हें लोकतंत्र से कोई मतलब नहीं, ये सिर्फ और सिर्फ वोट के लिए आपका इस्तेमाल करना चाहते हैं। इस तरह के बयान, भाषण और बातें अब आम चुकी हैं। क्या तुष्टिकरण बनाम ध्रुवीकरण की राजनीत हो रही है? जनता और जमीन से जुड़े मुद्दे गायब हैं। मोदी जी हों या राहुल गांधी, भाजपा हो या कांग्रेस अथवा अन्य पार्टियां, गरीबी, बीमारी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगाई की बात अब कोई नहीं करता। पक्ष हो विपक्ष, सभी की एक ही नीति है- ‘हिंदू-मुस्लिम का डर-भय दिखाकर वोट बैंक सुरक्षित करो!’

हजारों की संख्या में घुसपैठिए, रोहिंग्या, वक्फ बोर्ड और न जाने क्या-क्या! पिछली सरकारों के नाम पर रोना रहते हैं। कोई इनसे पूछे कि जब आपको सब पता है तो उसका खात्मा क्यों नहीं करते? अब तो सरकार आपकी है, शासन आपका है, तो फिर कार्यवाही क्यों नहीं की जाती? लेकिन न कोई पूछने वाला है और न ही कोई कार्यवही होगी, क्योंकि अगर सबकुछ ठीक हो गया तो सियासत कैसे चलेगी? हर पार्टी या दल एक ही बात समझाता है, अभी तक हम जो पिछड़े हैं, क्षेत्र में विकास नहीं हुआ, सड़कें नहीं बनी, भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगी, इसकी सारी जवाबदेही (कांग्रेस हो या भाजपा अथवा कोई अन्य पार्टी) पहले की सरकार की है। अच्छा बहाना है। लेकिन अपने गिरहबान में एक बार भी नहीं झांकते कि अब तो आपकी सरकार है। फिर भ्रष्टाचार चरम पर क्यों पहुंचता जा रहा है? तमाम कानूनी सुधार के बावजूद बहन-बेटियां असुरक्षित क्यों हैँ? सबकुछ ऑनलाइन होते हुए भी नौकरशाही में घूसखोरी क्यों बढ़ रही है?

दरअसल, सभी का एक ही मकसद है! धर्म और मजहब के नाम पर लोग भयभीत होंगे तो वोट उन्हीं को देंगे और उनकी सरकार बननी तय है। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर कब तक हिंदू मुस्लिम का भय दिखाकर वोट हासिल करते रहेंगे? कब तक धर्म-मजहब को खतरे में बताकर जनता को बेवकूफ बनाते रहेंगे? एक तरफ तो शिक्षित समाज का नारा दिया जाता है और दूसरी तरफ दकियानूसी बातें की जाती हैं। नफरत की दुकान खोलकर समाज को भयभीत करने की कोशिश की जाती है। आखिर कब तक यह नफरती सियासत की दुकान चलेगी? जवाब साफ है- जब तक हम आप जैसे इनके ग्राहक बने रहेंगे। राजनीति के पहरेदारों! हमें भय से मत छलो! सत्ता के लिए लोकतंत्र का रास्ता अपनाओ, जनता आपको पलकों पर बैठाकर रखेगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

 


गुरुवार, 19 जून 2025

 कुशल चिकित्सक बनने के लिए इच्छाशक्ति जरूरी

एक कुशल डॉक्टर होने के साथ-साथ अच्छे व्यक्तित्व के धनी और सामजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना गाजियाबाद के डॉ. एम. के. सिंह की पहचान है। इन्हीं कई मुद्दों पर वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र बच्चन ने बुधवार, 18 जून 2025 को फ्लोरेंस अस्पताल के डायरेक्टर चेंबर में उनसे बातचीत की। आप भी जानिए उनकी खूबियां-

डॉक्टर को मरीज ही नहीं भगवान समझते, समाज भी इन्हें ईश्वर का ही दर्जा देता है। हमारे आसपास ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जब डॉक्टर ने मरीज को नई जिंदगी दी हो। एक डॉक्टर मरीज को ठीक करने के लिए दिन-रात एक कर देता है। गाजियाबाद के डॉ. एम. के. सिंह उन्हीं में से एक हैं। एक कुशल चिकित्सक होने के साथ-साथ अच्छे व्यक्तित्व के धनी और सामजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना आपकी पहचान है। इन्हीं कई मुद्दों पर वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र बच्चन ने बुधवार, 18 जून 2025 को फ्लोरेंस अस्पताल के डायरेक्टर चेंबर में डॉ. एम. के. सिंह से बातचीत की। प्रस्तुत है उसके प्रमुख अंश:
आप डॉक्टर ही क्यों बने?
हमारी शुरू से ही सेवाभाव की भावना रही। डिग्री लेकर डॉक्टर तो कोई भी बन सकता है लेकिन एक अच्छा चिकित्सक आप तभी बन सकते हैं जब अंदर से इच्छाशक्ति हो। आप को तो पता है, कोविड के समय में कई डॉक्टरों ने अपना क्लीनिक तक बंद कर दिया था। कोविड के मरीज को हाथ लगाना तो दूर, उनसे बात तक नहीं करते थे। जबकि हम 25 से 30 मरीज रोजाना देखते थे। कुछेक तो ऐसे मरीज होते थे जिनके उपचार के साथ-साथ उनके परिवार के लिए राशन-पानी की भी व्यवस्था हमने की है। एक डॉक्टर कभी रिटायर नहीं होता।
क्या एक मरीज के प्रति दवा से ज्यादा डाक्टर का व्यवहार उसे स्वस्थ करने में सहायक होता है?
जी, जाहिर-सी बात है। एक डॉक्टर को अपने मरीज की अच्छी देखभाल करना बहुत ज़रूरी है। यह केवल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह डॉक्टरी पेशे का एक नैतिक दायित्व भी है। इसलिए हर डाक्टर को मरीजों के साथ सहानुभूति और सम्मान से पेश आना चाहिए।
बरसात का मौसम गया है। ऐसे में संक्रमण ज्यादा होता है। क्या सलाह देंगे?
बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियां लेकर भी आता है। इस मौसम में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, लेप्टोस्पाइरोसिस, टाइफाइड, हैजा, वायरल बुखार, हेपेटाइटिस , इन्फ्लूएंजा (फ्लू) आदि से लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं। इस मौसम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान देना चाहिए। नमी से बचाव करें। लेकिन खुद से किसी बीमारी का निदान करें और ओवर--काउंटर दवा लेने से भी बचें। अगर आपको किसी भी लक्षण का अनुभव होता है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।
तब भी बीमारियां हैं कि पीछा नहीं छोड़ती! आखिर क्या कारण है?
इसका एक मुख्य कारण है हमारी बदलती जीवनशैली। हम शारीरिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं। हमारे खानपान की आदतें ठीक नहीं हैं। व्यायाम कभी नहीं करते हैं। किसी किसी प्रकार का तनाव होता है और कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं। मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी बीमारियां आजकल सामान्य होती जा रही हैं।
आखिर हम इन बीमारियों से कैसे बच सकते हैं?
इन बीमारियों से बचने का सबसे अच्छा उपाय है कि आप हमेशा हर मामले में जागरूक रहें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, जैसे कि संतुलित आहार लेना, नियमित रूप से व्यायाम करना और तनाव से दूर रहना। नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच करवाएं और किसी भी बीमारी के लक्षणों को अनदेखा करें।
आजकल लोग मोबाइल से भी बीमार हो जा रहे हैं। क्या सलाह देंगे?
हर 15 मिनट में मोबाइल देखने से ब्रेक लें। मोबाइल का प्रयोग करते समय अपनी पीठ सीधी रखें और आंखों के स्तर पर मॉनिटर रखें। बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के बजाय, कूल्हे और कमर का अनुपात देखें, यह जोखिम कारकों को समझने में मदद करता है। वजन कम करें। व्यायाम करना दिनचर्या में शामिल करें। गर्दन और पीठ दर्द से बचने के लिए मोबाइल का उपयोग करते समय गर्दन को हमेशा सीधा रखें, बीच-बीच में ब्रेक लें और सोने के लिए सही तकिया का उपयोग करें।
आप फ्लोरेंस अस्पताल संचालित करते हैं। सरकार या गाजियाबाद जिला प्रशासन से कोई शिकायत है आपको?
नहीं। हमारा मानना है कि अगर आप अच्छा और सही काम कर रहे हैं तो सरकार कभी किसी को डिस्टर्व नहीं करती। फ्लोरेंस अस्पताल स्वास्थ्य से जुड़े सभी नियम-कानून का पालन करता है। हर मानक के तहत हमारा काम होता है।
एक आखिरी सवाल! पिछले दिनों आपके अस्पताल कोएक्सीलेंस अवार्ड्स 2025’ से नवाजा गया। कैसा महसूस करते हैं, आप?
देश की प्रतिष्ठित संस्थासमाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडियाने यह सम्मान दिया है। हमारे लिए सम्मानित होना गौरव की बात है। चिकित्सक या अस्पताल कोई भी हो, इस तरह के सम्मान से मनोबल बढ़ता है। उन्हें और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। यह अवसर जीवन में बार-बार नहीं आता। हमारे लिए यह एक यादगार क्षण था।एक्सीलेंस अवार्ड्स 2025’ जैसा सम्मान पाकर हम अभिभूत हैं।