शनिवार, 9 मई 2026

 बंगाल में शुभेंदु सरकार, जनमानस की बढ़ी उम्मीद

- जितेन्द्र बच्चन


शुभेंदु सरकार से जनता को अब उम्मीद है कि बंगाल में डर का माहौल खत्म होगा और राज्य भरोसे व विकास के दौर की ओर बढ़ेगा।




पश्चिम बंगाल के लिए शनिवार का दिन एक ऐतिहासिक सुबह लेकर आया। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में बीजेपी के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। ‘दादा’ के आसीन होने के साथ ही ‘दीदी’ का 15 साल का शासन खात्मा हो गया। बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव! खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बदलाव की धुरी में रहे और आज भव्य समारोह का हिस्सा भी बने। उनके साथ शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए।

‘सोनार बांग्ला’ के नारों से पूरा वतावरण गूंज उठा। यह नारा उस समय भी बुलंद हुआ था जब विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की 207 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की थी। टीएमसी में कभी नंबर दो की हैसियत रखने वाले शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक को हरा दिया। नतीजतन तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमटकर रह गई और आज उसके 15 साल के शासन का भी खात्मा हो गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में झालमुड़ी क्या खाया, बंगालियों का प्रिय भोजन मछली-भात भी पीछे हो गया। चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी और गुस्सा अब साफ दिख रहा है। कई लोग खुलकर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है, “ अभिषेक बनर्जी ने अपने घमंडी व्यवहार से पार्टी को 'खत्म' कर दिया।“

कहें भी क्यों न, ममता बनर्जी को जहां आज अपनी साख बचाने तक की चिंता बढ़ गई है, वहीं राजनीतिक सक्रियता और आक्रामक तेवरों के कारण पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की आंखों का तारा बने शुभेंदु मुख्यमंत्री बन गए हैं। उनके शपथ ग्रहण से पहले पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट वाले घर के बाहर सीआरपीएफ तैनात कर दी गई। कहीं वह कोई नया नाटक (विरोध) न खड़ा कर दें। लाचार, बेबस और एक असहाय महिला की तरह अपने ही घर में कैद! सियासत और सत्ता का अजीब खेल है!

याद करिए, ममता बनर्जी की सरकार में केंद्रीय अधिकारी भी उनके खिलाफ कार्यवाही करने में हिचकिचाते थे। दीदी के बिना एक पत्ता नहीं हिलता था। जबकि राज्य में लगातार अपराध बढ़ रहा था। कानून की धज्जियां उड़ाई जाती रहीं। घुसपैठियों की पौबारह थी। घर हो बाहर, यौन हिंसा और गुंडागर्दी चरम पर पहुंच गई। बलात्कार, हत्या और शोषण से लोग कराह रहे थे। आरजी कर कांड की चीख से तो पूरा देश सन्न रह गया। क्या-क्या नहीं हुआ पश्चिम बंगाल में! विकास का पहिया थम-सा गया।

लेकिन ममता दीदी अपनी ही बात करती रहीं। उनका एक ही एजेंडा था- बीजेपी को हरहाल में रोकना! वह भूल गईं कि सत्ता में बने रहने की उनकी हठधर्मिता एक दिन उन्हीं पर भारी पड़ सकती है। वहीं हुआ, बीजेपी ने जनभावना और जनमानस को जगाकर दीदी के पूरी तरह खिलाफ कर दिया। लोगों ने ममता सरकार को नकार दिया। दीदी की न कुर्सी बची और न सरकार। अभिषेक बनर्जी की हकीकत भी सबके सामने आने लगी। टीएमसी सरकार खत्म हो गई। शनिवार को महाकवि रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जनता जर्नादन को अब उनसे उम्मीद है कि बंगाल में डर का माहौल खत्म होगा और राज्य भरोसे व विकास के दौर की ओर बढ़ेगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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