शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

58 दिन की पनाह

दो महीने कहां छिपा रहा नारायण सार्इं? किसने दी पनाह? कौन है मददगार? क्या उन पर भी होगी कार्रवाई?

पाखंड का टूटा तिलस्म. संत का चोला ओढ़कर लड़कियों की अस्मत से खेलने वाले का चेहरा बेनकाब. पांच लाख का इनामी भगोड़ा नारायण सार्इं गिरफ्तार. धर्म की आड़ में अधर्म के पाप का पर्दाफाश. पूरे 58 दिन यह शातिरदिमाग शख्स देश की पुलिस के लिए छलावा बना रहा. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब के बड़े-बड़े अधिकारियों को चकमा देता रहा. मामले की तफतीश में लगी गुजरात पुलिस भी गच्चा खा गई, लेकिन दिल्ली क्राइम ब्रांच के कुछ अफसरों की नजर अर्जुन की तरह सिर्फ और सिर्फ मछली की आंख पर लगी रही. तीर निशाने पर लगा और 3 दिसंबर 2013 की सर्द रात नारायण सार्इं पुलिस के हत्थे चढ़ गया.
6 अक्टूबर 2013 को थाना जहांगीरपुरा सूरत में दर्ज एफआइआर के मुताबिक, सूरत की दो बहनें कथावचक आसाराम के अहमदाबाद गुरुकुल और नारायण सार्इं के साबरकांठा जिले के गांभई आश्रम में साधक थीं. छोटी बहन का नारायण वर्ष 2002 से 2005 तक यौन शोषण करता रहा. इसकी जानकारी नारायण की मां लक्ष्मी देवी और बहन भारती को भी थी. दोनों को इस मामले में सह आरोपी बनाया गया है. पीड़ित को नारायण कई बार अपने साथ सूरत के जहांगीरपुरा, पटना, काठमांडू और मध्य प्रदेश के मेघनगर आश्रमों में भी ले गया और वहां उसके साथ रेप किया. जबकि बड़ी बहन को अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में आसाराम साल 2001 से 2007 के बीच अपना शिकार बनाता रहा. इसी आरोप में तीन महीने से आसाराम जोधपुर जेल में बंद है. अब सूरत पुलिस की डीसीपी शोभा भूतड़ा नारायण साईं के खिलाफ बलात्कार, यौन उत्पीड़न, पीड़ित को गैरकानूनी तरीके से बंद रखने और दो अन्य मामलों की जांच कर रही हैं.
एफआइआर की भनक लगते ही नारायण सार्इं घर से 6 लाख रुपये लेकर भूमिगत हो गया. अग्रिम जमानत की फिराक में था. पुलिस को नारायण की मां-बहन भी नहीं मिलीं. 7 अक्टूबर को  पुलिस आयुक्त (सूरत) राकेश अस्थाना ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर एस.बी.पी. सिंह से बात की. सिंह ने अपराध शाखा के तेज-तर्रार अधिकारियों अडिशनल सीपी (क्राइम ब्रांच) आर.एस. यादव, डीसीपी क्राइम ब्रांच (नार्थ) कुमार ज्ञानेश, एसीपी के.पी.एस. मल्होत्रा और अपराध शाखा रोहिणी सेक्टर 18 के कुछ इंस्पेक्टरों की एक मीटिंग बुलाई और नारायण सार्इं की तलाश शुरू कर दी गई. सूरत पुलिस की एक टीम भी आरोपी की टोह में दिल्ली गई. रोहिणी, नजफगढ़, जफरपुर कलां और रिंज रोड स्थित कई स्थानों पर छापा मारा गया पर आरोपी का कुछ पता नहीं चला. इस बीच डीसीपी भूतड़ा को जान से मारने की धमकी जरूर मिली. पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि इश्तिहारी मुल्जिम बहुत शातिर है. वह देश छोड़कर भी भाग सकता है. उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया गया.
16 अक्टूबर को सूरत पुलिस की एक टीम ने फिर दिल्ली आकर नारायण के आश्रम में छापा मारा. 17 अक्टूबर को जयपुर (राजस्थान) और रतलाम (मध्य प्रदेश), 18 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), 19 अक्टूबर को दरभंगा (बिहार) और 25 अक्टूबर को बिरार (मुंबई) में दविश दी गई. डीसीपी ज्ञानेश, एसीपी मल्होत्रा और उनके मातहत भी नारायण की तलाश में दिल्ली एनसीआर की खाक छानते रहे.11 नवंबर को सूरत की संबंधित अदालत ने आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया. समझ में नहीं रहा था कि नारायण को जमीन निगल गई या आसमान. 2 दिसंबर को भी डीसीपी ज्ञानेश इसी उधेड़बुन में पड़े थे, तभी एक मुखबिर ने फोन पर बताया- ‘सर, नारायण लुधियान में है.’ ज्ञानेश की आंखों में चमक गई. उन्होंने फौरन एस.बी.पी. सिंह को रिपोर्ट की. इसके बाद अडिशनल सीपी यादव के नेतृत्व में 36 पुलिसकर्मियों की चार टीमें बनाकर लुधियाना (पंजाब) रवाना कर दी गर्इं. 3 दिसंबर की शाम होते-होते दिल्ली क्राइम ब्रांच के 20 और अधिकारी लुधियाना पहुंच गए. इससे पहले सूरत पुलिस की टीम भी चुकी थी.
संयुक्ति पुलिस टीम नेआॅपरेशन सार्इं के तहत लुधियाना के नारायण आश्रम में छापा मारा. वहां पता चला कि नारायण साहनेवाल के गौशाला में ठहरा है. उसके नजदीक ही पंजाब के उद्योगपति पंकज अग्निहोत्री की कोठी है. नारायण कई बार उनके यहां सिख भेष में आता-जाता रहा. क्राइम ब्रांच पुलिस ने पंकज के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस कि तो पक्खोवाल रोड, मॉडल टाउन, गिल रोड और दोराहा नहर के आसपास का एरिया पता चला. यह स्थान लुधियाना में नारायण आश्रम से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है और वहीं अग्निहोत्री का एक फार्म हाउस भी है. पुलिस वहां पहुंची तो ज्ञात हुआ कि अभी थोड़ी देर पहले ही नारायण फोर्ड ईको स्पोर्ट्स गाड़ी में एनएच-1 से दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है. गाड़ी का नंबर यूपी 15 बीएच 0035 है. डीसीपी ज्ञानेश ने दिल्ली से लुधियाना के बीच 332 किमी के रास्ते में राजपुरा, जीरकपुर, चंडीगढ़, अंबाला और मेरठ समेत आठ डाइवर्जनों पर 35 अफसरों की आठ टीमें तैनात कर दीं. रात करीब 10 बजे अंबाला डाइवर्जन पर एक ईको स्पोर्ट्स कार आती दिखाई दी. नारायण उसी में था. क्राइम ब्रांच की टीम ने उसका पीछा किया और कुरुक्षेत्र (हरियाणा) के पिपली गांव के पास पेट्रोल पंप पर आरोपी को धरदबोचा.
नारायण ने गिरफ्तारी के समय टी-शर्ट, पैंट, जैकेट और पहचान छिपाने के लिए लाल रंग की पगड़ी पहन रखी थी. उसके साथ उसका सुरक्षा अधिकारी और सहयोगी कौशल ठाकुर उर्फ हनुमान (एक लाख का इनामी मुल्जिम), ड्राइवर रमेश मल्होत्रा और जुवेनाइल कुक भी था. कुक निर्दोष लगा, उसे पुलिस ने छोड़ दिया. कार की तलाशी में 2.61 लाख रुपये नकद, 6 मोबाइल फोन, 129 सिमकार्ड, कुछ कपड़े, थोड़ी-सी जड़ी-बूटी, स्टोव, खाना बनाने के बर्तन, वियाग्रा और छह मोबाइल फोन बरामद हुए. पुलिस तीनों आरोपियों को अपराध शाखा रोहिणी सेक्टर 18 ले आई. यहां अधिकारियों ने पूछताछ शुरू की- ‘58 दिन कहां छिपे रहे? किसने पनाह दी? और कौन-कौन तुम्हारे गुनाह के साथी हैं?’ जवाब में नारायण मंद-मंद मुस्कुराता रहा, फिर प्रवचन देने लगा, ‘‘वर्दी का बेजा इस्तेमाल मत करो वरना तुम सभी पाप के भागीदार बनोगे. हम संत हैं, असत्य का सहारा नहीं लेते.’’ 4 दिसंबर 2013 को पुलिस ने 42 वर्षीय नारायण सार्इं, 29 वर्षीय कौशल और 27 वर्षीय रमेश को रोहिणी कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट धीरज मोर की अदालत में पेश किया. सूरत पुलिस ने सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर मांगा तो विरोध करते हुए नारायण सार्इं के वकील प्रदीप राणा ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को दुष्कर्म के मामले में फंसाया गया है. दलील दी कि नारायण सार्इं खुद कोर्ट में सरेंडर करने दिल्ली रहे थे, लेकिन क्राइम ब्रांच का कहना है कि नारायण नेपाल भागने की फिराक में था. अंत में अदालत ने तीनों आरोपियों को सूरत पुलिस को सौंप दिया.
हलचल से बातचीत करते हुए डीसीपी शोभा भूतड़ा ने बताया, ‘‘अब तक की जांच में पता चला है कि नारायण करीब 7 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक है. कई साधिकायों को वह अब तक खराब कर चुका है. उसने आश्रम में अश्लील जाल फैला रखा था. इसके सहयोगी मोहित से ऐसे कई एमएमएस मिले हैं, जिससे लगता है कि नारायण कुछ लोगों को ब्लैकमेल भी करता रहा है. सूरत की क्राइम ब्रांच इस मामले की अलग से जांच कर रही है.’’ वह आगे खुलासा करती हैं, ‘‘नारायण की पत्नी जानकी उर्फ शिल्पा ने बताया है कि यमुना नामक एक लड़की से नारायण का अवैध संबंध रहा. दोनों का एक बेटा भी है. इसीलिए उसने नारायण से दूरी बना ली और अब दोनों का तलाक का मामला इंदौर कोर्ट में चल रहा है.’’
वर्ष 2001 से 2005 की अवधि तक खुद को सार्इं का पर्सनल असिस्टेंट (पीए) बताने वाले महेंद्र चावला का कहना है कि दिल्ली की मोनिका अग्रवाल नारायण की पसंद की लड़कियां उसे मुहैया करवाती थी. नारायण का विशेष सहयोगी कौशल मूलरूप से दरभंगा बिहार का रहने वाला है, जो नारायण के सेक्स रैकेट का एक मजबूत स्तंभ है. नारायण के आश्रमों में दुष्कर्म, अवैध संबंध और महिलाओं को टॉर्चर करने की कई कहानियां दफन हैं. लड़की के लिएमलंग और कंडोम के लिएवस्तु आश्रम में कोड वर्ड था. अमीर और सुंदर लड़कियां नारायण की पहली पसंद हैं. कोई नई लड़की उसके लिए तैयार होती तो उसके लिएतिलक लगा लिया है कहा जाता और किसी नई लड़की को चुनने के लिएभोग तैयार हो गया है बताया जाता.
आगरा पुलिस के एक अधिकारी ने नाम छापने की शर्त पर बाताया कि 20 अक्टूबर 2013 को नारायण सार्इं छिपने के लिए वहां भी आया था. रामबाग निवासी लक्ष्मण सेवकानी आसाराम का भक्त है. नारायण उसके यहां रात भर रहा. उसका हुलिया बदला हुआ था. दाढ़ी-मूंछ और सिर के बाल साफ थे और भगवा वस्त्र धारण कर रखा था. दूसरे रोज नारायण कहां गया, लक्ष्मण को नहीं पता. सूत्रों की मानें तो नारायण का अगला पड़ाव राजस्थान का भतरपुर शहर था. यहां उसका एक रिश्तेदार रहता है. वह भी नारायण की बदली वेशभूषा देखकर हैरत में पड़ गया. भरतपुर का धनाढ्य और प्रभावशाली व्यक्ति है. पुलिस के पचड़े में पड़ने के लिए उसने नारायण साईं से हाथ जोड़ लिया. जयपुर के पुलिस कमिश्नर भूपेंद्र दत्त और फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर .एस.चावला ने बताया कि उनके यहां भी जांच चल रही है कि क्या नारायण सार्इं यहां आया था और किसने उसे पनाह दी थी? सूरत क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सीएम कुंभानी को नारायण मामले में गिरफ्तार किया गया है. कुंभानी पर आरोप है कि उसने नारायण सार्इं को भागाने में उसकी मदद की और इसके लिए 5 करोड़ रुपये की घूस ली.
सूरत पुलिस के मुताबिक, आरोपी को पनाह देने के आरोप में 8 दिसंबर को फैजाबाद (उत्तर प्रदेश) निवासी दो लोगों- सत्य शिव प्रकाश और नीलकमल सुंदरम को हिरासत में लिया गया है. उत्तर प्रदेश के सीतापुर और ग्रेटर नोएडा, उत्तराखंड में हरिद्वार, गुजरात में बलसाड और दरभंगा बिहार में भी जांच चल रही है कि क्या नारायण वहां आया था. बहरहाल, इसमें दो राय नहीं कि नारायण का नेटवर्क बहुत मजबूत है. उसके समर्थन में कुछ लोग सारे मामले को एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए धरना-प्रदर्शन भी कर रहे हैं. इसी का नतीजा है कि करीब दो महीने तमाम कोशिशों के बावजूद देश की पुलिस नारायण का सुराग तक नहीं लगा पाई. अब पुलिस को इन सवालों के जवाब भी ढूंढने होंगे कि बरामद 129 सिमकार्ड किसके नाम पर हैं और नारायण को कैसे मिले? लड़कियों की सप्लाई करने वाली मोनिका कौन है? उसके बच्चे की मां यमुना कहां हैं और डीसीपी शोभा भूतड़ा को जान से मारने की धमकी किसने और क्यों दी?
कारोबारी की है कार
मेरठ आरटीओ कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने रेप के आरोपी और पांच लाख के इनामी नारायण सार्इं से जो कार बरामद की है, उसकी मालिक 70 , साकेत, मेरठ निवासी उद्योगपति अजय दीवान की पत्नी हैं. खुद अजय दीवान ग्रुप आॅफ इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर हैं. इन्हें आसाराम का समर्थक माना जाता है. नारायण की गिरफ्तारी के बाद से बिजनसमैन परिवार का कोई भी सदस्य घर पर नहीं मिला. दीवान के वकील विकास सोनी से संपर्क करने पर उन्होंने बताया, ‘‘अजय की मित्रता नारायण सार्इं के ड्राइवर हरियाणा निवासी रमेश से थी. उसे उन्होंने कुछ दिनों के लिए अपनी कार इस्तेमाल करने को दी थी. इसमें अजय और नेहा का कोई दोष नहीं है.’’ वहीं मोहल्लेवालों का कहना है कि फरारी के दौरान नारायण कुछ दिनों तक कंकरखेड़ा मेरठ स्थित आश्रम में रुका था. पुलिस को इसकी भनक लगी तो वह यहां से फरार हो गया.
बेहद शातिर है नारायण
‘‘नारायण बेहद शातिर है. पुलिस को गुमराह करने की उसने पूरी कोशिश की. उसके खिलाफ हमारे पास कई ठोस सबूत हैं. उसके दूसरे गुनाहों को भी पुलिस खंगाल रही है.’’

- राकेश अस्थाना, पुलिस आयुक्त, सूरत

शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013

शनिवार, 14 सितंबर 2013

मोदी : मुकद्दर का सिकंदर



गुजरात के एक रेलवे स्टेशन पर एक बच्चा चाय बेचा करता था। उस वक्‍त न तो स्टेशन को खबर थी और न ही उस बच्चे को इस बात का इल्म था कि चाय के गिलास उठाने वाले उसके हाथ एक रोज एक बड़े सियासी दल की कमान संभालेंगे।
नरेंद्र दामोदर मोदी। गुजरात के मुख्यमंत्री पद से भाजपा के पीएम पद के दावेदार तक और 'मौत के सौदागर' से 'विकास पुरुष' वाली छवि गढ़ने तक, मोदी ने लंबा न सही, लेकिन दिलचस्प सफर जरूर तय किया है।
13 साल में सीएम की कुर्सी तक
शुरुआत से हिंदुत्व विचारधारा की ओर झुकाव रखने वाले 62 वर्षीय मोदी के बारे में उनके सहयोगियों का कहना है कि वह अपने लक्ष्यों से डिगना नहीं जानते। हर मुश्किल को मौके में बदलने की महारत उन्हें हासिल है। वह ह‌िंदूवादी दक्षिणपंथी राजनीति में पहले प्रचारक बने और 13 साल के अंतराल में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए। कमान मिली देश के सबसे विकसित राज्य की, हालांकि तब तक उन्हें किसी तरह का कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था।
'भुला देते हैं अपने मददगारों को'
इस लंबी सियासी पारी में उनकी जिंदगी को करीब से जानने वाले और आलोचक यह इल्जाम भी लगाते हैं कि मोदी उन लोगों को भुला बैठते हैं, जिनके सहारे सीढ़ी चढ़ते हैं। इनमें से एक लालकृष्‍ण आडवाणी हैं, जिन्होंने भाजपा के हीरो होने के वक्‍त मोदी को चमकाया, निखारा और उन्हें इस लायक बनाया कि अपने सम‌कक्षों में खड़े होकर भी वह कतार से आगे दिखें। राजनीतिक विश्लेषक जीवीएल नरसिम्हा राव का कहना है, "वह दृढ़ता रखते हैं। ईमानदार और मेहनती हैं। वह समझौता नहीं करते, भले नतीजा कुछ हो। अस्थायी जीत के लिए मोदी खुद को नहीं बदलेंगे।"
पिता चलाते थे चाय की दुकान
मेहसाणा के एक मध्य परिवार में जन्मे मोदी के पिता दामोदरदास चाय की एक छोटी दुकान चलाते थे। उनका बेटा केतली में भरकर चाय स्टेशन में मुसाफिरों तक पहुंचाया करता था। मकान भी कोई खास नहीं था। जो उन्हें करीब से जानते हैं, बताते हैं कि वह स्कूल में औसत ही थे। लेकिन मोदी की मानें, तो वह समर्पित हिंदू रहे हैं, जिन्होंने चार दशकों तक नवरात्रि के दौरान हमेशा उपवास को चुना। जीवनी लिखने वाले निलंजन मुखोपध्याय का कहना है कि मोदी की उम्र काफी कम थी, जब उनकी शादी हो गई लेकिन गौना नहीं हुआ।
सीक्रेट रखी शादी की बात
उन्होंने अपनी शादी को हमेशा सीक्रेट रखा, वरना वह आरएसएस में प्रचारक न बन पाते। वह कई बार महीनों के लिए अपने घर गायब हो जाया करते थे। दूरदराज के इलाकों में रहते या फिर हिमालय की तरफ चले जाते। एक बार गीर के जंगलों में एक छोटे मंदिर में भी रहे। आखिरकार 1967 में उन्होंने परिवार से अलग होने का फैसला किया। वह 1971 की भारत-पाक जंग के बार औपचारिक रूप से आरएसएस में शामिल हुए थे। दिल्ली के आरएसएस दफ्तर में आए, तो उनकी दिनचर्या बड़ी कठिन थी। सवेरे 4 बजे जागना, वरिष्ठ सहयोगियों के लिए चार-नाश्ते का इंतजाम करना और पत्रों का जवाब देना। वह बर्तन भी मांजते और झाड़ू भी लगाते थे।

सोमवार, 26 अगस्त 2013

http://jbachchan.blogspot.in/

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                      अध्यात्म और अनाचार

आसाराम के आश्रम में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म! विवादित संत ने फिर किया एक बार अपनी हरकतों से देश को शर्मसार! अब पुलिस और कानून से छिपते फिर रहे हैं बाबा! संत समाज को लगा धक्का! देश में गुस्से की लहर। घटना से तमाम भक्त आहत! कई ने बताया साजिश! क्या है सच?


-जितेन्द्र बच्चन
सत्संग कर करोड़ों में खेलनेवाले 72 साल के आसाराम बापू पर इल्जाम और तोहमत कोई नई बात नहीं है। बापू और विवादों का चोली-दामन का साथ है, लेकिन इस बार उन पर जो आरोप लगे हैं, उसने अब तक दूसरे तमाम इल्जामों को पीछे छोड़ दिया है। आरोप है एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण का। उस लड़की के शोषण का, जो गई तो थी उनके गुरुकुल में शिक्षा, संस्कार और दीक्षा की आस लेकर, लेकिन लड़की की मानें तो आसाराम ने न सिर्फ उसे निराश किया, बल्किअकेले में उसके साथ ज्यादती तक कर डाली। छिंदवाड़ा के गुरुकुल में पढ़ाई कर चुकी लड़की के माता-पिता ने इस सिलिसले में जो रिपोर्ट लिखाई है, वह बेहद संगीन है। लड़की के घरवालों को आश्रम की वार्डन ने 8 अगस्त को फोन कर बताया था कि उनकी बेटी की तबियत बिगड़ गई है और बापू ने दूर से ही मंत्र फूंककर उनकी बेटी को फिलहाल ठीक कर दिया है, लेकिन चूंकि उस पर भूत-प्रेत का साया है, उसे पूरी तरह ठीक होने के लिए बापू को अनुष्ठान करना होगा। लड़की के घरवाले बेटी को लेकर घर आ गए। बाद में अनुष्ठान के लिए बाबा से मिलने की कोशिश की, तो उन्हें बताया गया कि बाबा 14 अगस्त 2013 को जोधपुर के आश्रम में मिलेंगे। लड़की के माता-पिता अनुष्ठान के लिए बेटी को लेकर वहां पहुंच गए। वहां बापू ने उनके ठहरने का इंतजाम करवा दिया और 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के दिन अनुष्ठान के बहाने उनकी बेटी के साथ उसी आश्रम में यौन शोषण किया। लड़की ने जब विरोध किया, तो बाबा ने उसका मुंह बंद कर दिया और जान से मारने की धमकी दी।

शिकायत के मुताबिक, लड़की डर गई थी। पूरा परिवार जब घर लौटा, तो 17 अगस्त को लड़की ने अपने घरवालों से सारी बात बताई। माता-पिता पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा। जानकारी करने पर पता चला कि 18 से 20 अगस्त तक दिल्ली के रामलीला मैदान में बापू शिविर कर रहे हैं। पीड़ित परिवार दिल्ली आकर मध्य जिला के थाना कमला मार्केट पुलिस से मिला। पुलिस भी हैरान रह गई। लड़की का मजिस्ट्रेट के सामने 164 के तहत बयान कराया। उसमें भी पीड़िता ने आसाराम बापू पर जोर-जबरदस्ती करने की बात कही। इसके बाद लड़की का मेडिकल कराया गया। यौन शोषण की पुष्टि होते ही पुलिस ने आसाराम बापू के खिलाफ रेप (दफा- 376), छेड़खानी (दफा-354), धमकी देने (दफा- 509) और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट यानी पोस्को की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद आगे की कार्रवाई के लिए मामला जोधपुर पुलिस को भेज दिया।

1941 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पैदा हुए आसाराम हरपालानी के पिता कोयला और लकड़ी बेचते थे। बाद में विभाजन के समय यह परिवार पाकिस्तान से गुजरात आ गया। यहां आसाराम हरपालानी को करीब 10 एकड़ उपजाऊ जमीन मिली, जिसमें उन्होंने अपना पहला आश्रम बनाया। इसके बाद जल्द ही आसाराम ने अपना सरनेम हरपालानी की जगह बापू कर लिया। आश्रम के प्रवक्ता मनीष बगाड़िया के अनुसार, आज दुनिया भर में आसाराम के पास 425 आश्रम, 1,400 समिति, 17,000 बाल संस्कार केंद्र और 50 गुरुकुल हैं। उनका दावा है कि भारत और विदेश में आसाराम बापू के पांच करोड़ से अधिक अनुयायी हैं। क्योंकि हिंदू परंपरा में संत होना समाज की अच्छाईयों से भी ऊपर होना माना जाता है, लेकिन जब एक संत पर ही बार-बार विवादों के बादल घिरने लगें, तो संत की शुचिता पर सवाल खड़े होना लाजमी है। आसाराम बापू पर यौन शोषण का आरोप असल में उन पर जड़ चुके सिलिसलेवार आरोपों की नई कड़ी है। सबसे सनसनीखेज मामला जुलाई 2008 में सामने आया था, जब आसाराम के अहमदाबाद आश्रम में पढ़ने वाले दो मासूम बच्चों दिनेश वाघेला (11) और अभिषेक वाघेला (10) की लाश आश्रम के साथ से ही बहने वाली साबरमती नदी में मिली थी। इस रहस्यमयी मौत के बाद बच्चों के घरवालों ने इस घटना का जिम्मेदार आश्रम को ठहराया था और मामले की जांच कर रही पुलिस ने भी अपने हलफनामे में आश्रम में चलने वाले काले जादू और दूसरी रहस्यमयी कारस्तानियों का खुलासा किया था।

मौत का यह हंगामा थमा भी नहीं था कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के आश्रम स्कूल में साढ़े चार साल के बच्चे रामकृष्ण यादव की लाश मिली। एकदम से हड़कंप मच गया, फिर अगले ही दिन आश्रम के बाथरूम में एक और बच्चे की रहस्यमयी हालत में मौत हो गई। दिसंबर 2009 में आसाराम बापू पर उन्हीं के एक पूर्व भक्त राजू चंडोक ने अपनी हत्या की कोशिश करने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी। राजू रात में मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे, तभी दो लोगों ने हत्या के इरादे से उन पर गोली चला दी थी। इस मामले में गुजरात पुलिस ने आसाराम को नामजद किया है। राजू चंडोक का कहना है कि आसाराम बापू के आश्रम में अध्यात्म की आड़ में महिलाओं का यौन शोषण किया जाता है।

संसार को मोह-माया से मुक्त होने का प्रवचन देने वाले विवादित संत आसाराम बापू जमीन विवादों में भी उलझे हुए हैं। इन पर रतलाम में करीब 100 एकड़ जमीन कब्जा करने का मामला दर्ज है। घटना 2001 की है। मंगलया मंदिर के पास आसाराम के योग वेदांत समिति ने 11 दिन के लिए एक जमीन ली थी, लेकिन उसके बाद भी समिति ने जमीन खाली नहीं की। करीब 700 करोड़ रुपये की यह जमीन जयंत विटामिन्स लिमिटेड की है। इस जमीन के मामले में आसाराम, उनके बेटे नारायण सार्इं और कुछ अन्य लोगों को अरोपी बनाया गया है। इसके अलावा राजौरी गार्डन दिल्ली की बुजुर्ग महिला सुदर्शन कुमारी ने भी आसाराम आश्रम की दिल्ली इकाई पर आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए उसके घर की एक मंजिल आश्रम की प्रापर्टी बना दी गई।

इस तरह कभी संत आसाराम के दामन पर दाग लगा, तो कभी उनकी जुबान ने ही उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया। बाबा कई बार कुछ ऐसा बोलते रहे हैं कि विवाद खड़ा हो जाता है। दिल्ली निर्भया दुष्कर्म मामले को लेकर जब दिल्ली समेत पूरा देश बेजार था, तो 7 जनवरी 2013 को आसाराम ने ऐसा ऊटपटांग बयान दिया कि पूरे देश के लोग सन्न रह गए। बाबा का कहना था कि अगर दामिनी लड़कों को भैया कह देती और छोड़ने की बात करती तो बच सकती थी। आसाराम बापू की इस बात ने पूरे देश के लोगों की भावनाओं को आहत किया। उनके बयान पर कोहराम मच गया, तो अपने बचाव में आसाराम मीडिया पर ही तोहमत जड़ने लगे कि उनकी बात को गलत तरीके से रखा गया है। 10 अप्रैल 2012 को इंदौर में एक प्रवचन के दौरान आसारान ने अपना आपा खोकर अपने ही एक सेवादार को अपशब्द कहे। उसे पागल कहा और कपड़े उतारकर शिविर से बाहर भगाने का आदेश दे दिया।

9 अक्टूबर 2011 को दिल्ली में यमुना के किनारे एक ध्यान शिविर के दौरान बड़बोले बाबा ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में कहा कि राहुल गांधी कम बुद्धि वाले बबलू हैं। 27 जून 2011 को आसाराम ने महात्मा गांधी के बारे में कहा था कि गांधी को देश छोड़कर चले जाना चाहिए था। पिछली होली के दौरान जब महाराष्ट्र का एक बड़ा इलाका भीषण सूखे की चपेट में था, उस वक्त सूरत में भक्तों के साथ होली खेली और हजारों लीटर पानी बर्बाद किया। विरोध हुआ, तो उन्होंने महाराष्ट्र में भी डंके की चोट पर होली खेली।

ताजा मामले में आसाराम के प्रवक्ता सुनील वानखेड़े का दावा है कि 15 अगस्त को बापू जोधपुर में नहीं थे। यह बापू को बदनाम करने की कोशिश है। सब विरोधियों की चाल है। खुद आसाराम बापू ने भी कहा कि जिस रात यह वारदात हुई, उस रात वह आश्रम में नहीं थे। जबकि जोधपुर के जिस फार्म हाउस में यह घटना हुई, उसके मालिक रणजीत देवड़ा ने पूछताछ में बताया कि 15 अगस्त को आसाराम बापू वहीं थे और पीड़ित बच्ची अपने माता-पिता के साथ यहां आई थी। यह खबर आते ही आसाराम बापू अपने बयान से बदल गए। उन्होंने कहा, ‘मैं घटना के दिन आश्रम में मौजूद था, लेकिन लड़की को कुछ लोगों ने भटका दिया है। भगवान बुद्ध पर भी ऐसे आरोप लगे थे, पर सच्चाई सामने आ जाएगी। अगर वे मुझे सलाखों के पीछे डालें, तो मैं हंसते हुए जेल जाना चाहता हूं। मैं जेल को वैकुंठ जैसा मानता हूं।’

आसाराम ने यह तो मान लिया कि घटना के रोज वह आश्रम में मौजूद थे, लेकिन आगे जो उन्होंने कहा वह धर्मनिषिद्ध है। अनाचार है। आसाराम जेल को वैकुंठ बताते हैं। इसका मतलब, जेल में जितने कैदी है, उन्हें किसी गुनाह की सजा नहीं मिली है? संत तो सत्य के प्रतीक होते हैं। उन्हें जांच से कैसी आंच? अगर आसाराम बापू निर्दोष हैं, तो उन्हें इस तरह के ऊल-जुलूल उदाहरण देने की क्या जरूरत है? उन्हें खुद पुलिस अधिकारी को बुलाकर अपनी सफाई पेश करनी चाहिए थी। इस देश की करोड़ों जनता बाबा के साथ होती, लेकिन वे तो लुका-छिपी का खेल खेल रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक बापू मध्य प्रदेश में कहीं शरण लिए हुए हैं, फिर कौन सच है कौन झूठ, कैसे होगा इसका फैसला?

अध्यात्म की आड़ में अनाचार का खेल खेलने वाले बाबा को लेकर पूरे देश में गुस्से की लहर है। 22 अगस्त को आरोपी आसाराम बापू के खिलाफ राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में प्रदर्शन हुए। वाराणासी और जोधपुर में बाबा के पुतले फूंके गए। दिल्ली, कोटा, और कानपुर में उनके फोटो पर जूते-चप्पलों की माला पहनाई गई। 23 अगस्त को यह मामला राज्यसभा में उठाया गया। कांग्रेस सांसद प्रभा ठाकुर ने उमा भारती के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें आसाराम के दुष्कर्म मामले को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी से जोड़ा गया है। वहीं, 23 अगस्त को दिल्ली में बाबा के दर्जनों भक्तों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर आसाराम के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद करने की मांग की।

इस बीच पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ, जोधपुर के डीसीपी (वेस्ट) अजयपाल लांबा और इस मामले के जांच अधिकारी एसीपी चंचल मिश्रा पीड़ित लड़की को लेकर मड़ाई के उस फार्म हाउस पर गए, जहां की घटना बताई गई है। पुलिस आसाराम के खिलाफ सुबूत इकट्ठे करने में लगी है। महिला आयोग के दखल देने पर एसआईटी भी मामले की जांच कर रही है। छिंदवाड़ा में गुरुकुल की वार्डन से भी इस मामले में पूछताछ की गई है। पुलिस का कसता शिकंजा देखकर अहमदाबाद के अपने आश्रम से आसाराम गायब हो गए हैं। आश्रम के मीडिया कॉर्डिनेटर का कहना है कि उन्हें बाबा के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वह एकांतवास में चले गए हैं, लेकिन आसाराम बापू यह भूल रहे हैं कि काननू से बड़ा कोई नहीं होता। जोधपुर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। आज नहीं तो कल बाबा को अदालत के कटघरे में खड़ा होना ही होगा। क्योंकि उन पर जो आरोप हैं, वे बेहद संगीन हैं और सभी धाराएं गैर जमानती हैं।

अनुष्ठान की आड़ में आघात
मैं मूलत: शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूं। हाल में छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) स्थित आसाराम बापू के गुरुकुल में रह रही थी। 6 अगस्त 2013 को मेरी तबीयत खराब हो गई। 8 अगस्त को मेरे माता-पिता को सूचना दी गई। वे छिंदवाड़ा आ गए। उन्हें बताया गया कि तबीयत थोड़ी ठीक है, लेकिन झाड़-फूंक की जरूरत है। यह काम बापू खुद करेंगे। वे अभी जोधपुर में हैं, इसलिए आप जोधपुर चले जाएं। 15 अगस्त को हम लोग जोधपुर पहुंचे। आसाराम ने मेरे माता-पिता से कहा कि मुझे आश्रम में छोड़ दें। अनुष्ठान की जरूरत है। उसी रात आसाराम मुझे अलग कमरे में ले गए और मेरे साथ गलत काम किया, फिर जान से मारने की धमकी देकर मुझे अगले दिन छिंदवाड़ा जाने को कहा। मैं बहुत डरी हुई थी। छिंदवाड़ा न जाकर माता-पिता के साथ शाहजहांपुर चली गई। वहां सारी बात मां से बताई। उन्होंने पिता से पूरा वाकया बताया। पिताजी ने बाबा के बारे में पता किया। ज्ञात हुआ कि दिल्ली के रामलीला मैदान में 18 से 20 अगस्त के बीच सत्संग होने वाला है। हम लोग दिल्ली गए, लेकिन हमें बापू से मिलने नहीं दिया गया। परेशान होकर हम 19 अगस्त को थाना कमला मार्केट पुलिस के पास पहुंचे। मेरे साथ आसाराम ने ही गलत काम किया है। अनुष्ठान की आंड़ में आघात पहुंचाया गया है। चाहें तो कोई भी जांच करा ली जाए। (पीड़ित किशोरी का बयान)

हमले के डर से भूमिगत हुआ परिवार
25 अगस्त, 2013 को शाहजहांपुर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, विवादित संत आसाराम बापू पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली लड़की का पूरा परिवार हमले के डर से भूमिगत हो चुका है। पीड़ित परिवार को भीय है कि उनके घर पर बाबा के समर्थक हमला कर सकते हैं। चांदापुर रोड स्थित आसाराम आश्रम की देखभाल करने वाले इस कट्टर अनुयायी की बेटी के साथ ऐसा हुआ होगा, यह बाबा के किसी भक्त ने कभी नहीं सोचा था। वे हतप्रभ हैं। वहीं, आश्रम में मौजूद कुछ लोगों का कहना है कि यह सब बापू को बदनाम करने की साजिश है। इससे पहले भी उन्हें बदनाम कराया गया, अब फिर वही दोहराया जा रहा है। यहां तक कि मीडिया को भी खरीद लिया गया है।

और भी कई बाबा हो चुके हैं नंगे
इस तरह के विवादों में आने वाले आसाराम बापू पहले आध्यात्मिक गुरु नहीं हैं। कई नामी बाबाओं पर सेक्स सहित कई गंभीर आरोप पहले भी लग चुके हैं।
स्वामी प्रतिभानंद
प्रतिभानंद पर दीपक भारद्वाज मर्डर केस में शामिल होने का आरोप है। दीपक की उनके उनके दिल्ली के फार्महाउस में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में एक के बाद एक खुलासे होने के बाद स्वामी प्रतिभानंद शक के दायरे में आए और पुलिस ने जहां-तहां उनकी तलाश करनी शुरू कर दी। प्रतिभानंद महाराष्ट्र के बीड जिले का रहने वाला है। दिल्ली पुलिस ने उसके बारे में जानकारी देने वाले को एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी।
स्वामी नित्यानंद
इसके खिलाफ कई संगीन आरोप हैं और ढेर सारे मुकदमें चल रहे हैं। दुष्कर्म और गैर कानूनी काम करने के कुछेक मामलों में नित्यानंद जेल की हवा भी खा चुका है। नित्यानंद का एक सेक्स स्कैंडल का वीडियो भी लीक हुआ था, जिसने उस पर लोगों के शक को यकीन में बदल दिया। नित्यानंद पर इल्जाम है कि वह आश्रम के हर सदस्य से एक करारनामे पर दस्तखत करवाता था। इस करारनामे के अनुसार, वह जब जी चाहे और जिससे जी चाहे, सेक्स संबंध बनाने को स्वतंत्र है। इस आरोप के बाद नित्यानंद की खूब निंदा हुई।
इच्छाधारी बाबा भीमानंद
इच्छाधारी बाबा पर सेक्स रैकेट चलाने और मर्डर कराने का आरोप है। करीब 500 लड़कियों को अपने गिरोह में काम करने को मजबूर करने का उस पर इल्जाम है। इन लड़कियों में छात्राएं, एयर होस्टेस और कई गृहणियां शामिल थीं। खुद को इच्छाधारी बताने वाले इस बाबा ने सेक्स रैकेट से ही करीब 25 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की। इसके अलावा भी इसके कई कारनामे उसकी एक डायरी से उजागर हो चुके हैं। आजकल जेल में है।
रामदेव
रामदेव पर अपने ही गुरु  को मारने के आरोप लगे, लेकिन कोई ठोस सबूत न होने की वजह से रामदेव पर पुलिस का शिकंजा नहीं कस पाया। हालांकि, इस मामले में राकेश नाम का एक व्यक्ति सामने आया था, जिसका आरोप था कि रामदेव ने ही गुरु की हत्या करने के बाद उनके शव के छोटे-छोटे टुकड़े कर नदी में बहा दिए थे। साथ ही रामदेव पर कई सारे भूमि विवाद भी चल रहे हैं। रामदेव की आय को लेकर भी कई सारे विवाद लगे और इन्हें एक बाबा न कहकर एक बिजनेसमैन कहा गया।
निर्मल बाबा
निर्मल बाबा लोगों के दुख दूर करने के काफी चटपटे उपाय बताया करते हैं। अपनी अनोखी अदाओं के कारण ही निर्मल बाबा विवादों में घिर चुके हैं। गोलगप्पे, चटनी, समोसे और चाऊमीन से निर्मल बाबा हर परेशानी का हल कर दिया करते हैं। अब इसे क्या कहा जा सकता है, परोपकार या ढोंग? निर्मल बाबा के समागमों में आने वाले हर दर्शनार्थी को दो हजार रुपये से भी ज्यादा की राशि देनी पड़ती है। इस तरह देखा जाए तो निर्मल बाबा प्रतिमाह करीब सात करोड़ रु पये महज दर्शन शुल्क लेते हैं। ये परोपकार है या कारोबार? निर्मल बाबा के खिलाफ कई अलग-अलग थानों में शिकायत की गई है, जिसकी जांच चल रही है। साथ ही इसकी वजह से बाबा के कारोबार में गिरावट भी आई है।
गुरमीत राम रहीम सिंह
सितंबर, 2008 में सिरसा (हरियाणा) के डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह पर डेरे की एक साध्वी ने दुष्कर्म के आरोप लगाए। प्रमुख ने सारे इल्जाम बेबुनियाद बताए। बाद में मामले में सीबीआई के स्पेशल जज एके वर्मा की अदालत ने दफा 376 (रेप), 506 (आपराधिक धमकी) और 509 (महिला की मर्यादा को अपमानित करने वाली भावभंगिमा बनाना या बातें कहना) के तहत आरोप तय किए, तो सभी हैरान रह गए।
सुधांशुजी महाराज
सुधांशु महाराज पर फर्जी रसीदें देकर चंदा लेने का आरोप लगा था। एक तरफ तो सुधांशु जी महाराज अध्यात्म की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर धोखाधड़ी से अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं। उप पर विश्व जागृति मिशन आश्रम के नाम पर धोखाधड़ी करने व गोरखधंधा करने का भी इल्जाम लग चुका है।

आश्रम में ही थे आसाराम
यह साबित हो चुका है कि घटना वाले दिन लड़की और आसाराम बापू आश्रम में ही थे। बाकी के सुबूत आरोपी के खिलाफ जुटाए जा रहे हैं।
-बीजू जॉर्ज जोसेफ, पुलिस आयुक्त
सारा मामला झूठा है
बापू निर्दोष हैं। लड़की झूठ बोल रही है। उन्हें सोनिया और राहुल के विरोध की सजा मिली है। कांग्रेस शासित राज्यों में झूठा मामला दर्ज किया गया है।
-उमा भारती, भाजपा उपाध्यक्ष
नहीं बख्शा जाएगा
बापू के खिलाफ आरोपों में जरा भी सच्चाई है, तो कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
-अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री, राजस्थान
श्रद्धा की हत्या
दुष्कर्मी संत लादेन से कम नहीं। लादेन ने तो हजारों की हत्या की होगी, ये छद्मवेशी तो करोड़ों लोगों के श्रद्धा की हत्या कर रहे हैं।
-तरुण सागर, जैन मुनि