शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

                         एक सुनंदा, सैकड़ों सवाल



किसी खूबसूरत पहेली की तरह थीं सुनंदा. ऐसी पहेली, जो हमेशा सुलझी दिखती थी, लेकिन अनसुलझी ही इस दुनिया से विदा हो गर्इं. बाकी रह गए कई पोशीदा राज, सवाल और उनके जवाब.

इसे तकदीर का सितम कहें या फिर कुछ और, सुनंदा पुष्कर जीते जी जितनी सुर्खियों में रहीं, अब मौत के बाद भी वे उतनी ही सुर्खियों में हैं. कश्मीर मूल की कनाडाई नागरिक सुनंदा की जिंदादिली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महिलाओं पर लिखी प्रसून जोशी की एक कविता वह अक्सर गुनगुनाती रहतीं- ‘नारी हूं मैं, मजबूरी या लाचारी नहीं. खुद अपनी जिम्मेदारी हूं मैं, नारी हूं मैं.’ जिन मुद्दों पर बड़े-बड़े नेता बयान देने से बचते हैं, उन पर सुनंदा बड़ी बेबाकी से अपनी राय रखतीं. किसी ने सपने में नहीं सोचा होगा कि इतनी तरक्कीपसंद महिला का अंत इस तरह होगा. 17 जनवरी 2014 की रात दिल्ली के होटल लीला से मौत की एक ऐसी पहेली बाहर निकली, जो अब सुलझाए नहीं सुलझ रही है. 20 जनवरी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से यह बात भी साफ हो गई कि सुनंदा की मौत दवा के ओवरडोज से हुई है. यानी दवा जहर बन गई, लेकिन दवा का ओवरडोज सुनंदा ने जान-बूझकर लिया या फिर अनजाने में? इसे खुदकुशी कहेंगे या फिर गलती से हुई मौत, यह सवाल अब भी बरकरार है.

52 साल की सुनंदा की पहचान सिर्फ केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री शशि थरूर की पत्नी तक ही सीमित नहीं थी. वह एक सफल बिजनेस वुमन थीं और उनकी खुद की संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक है. हाई प्रोफाइल सुनंदा ने जीवन का सफर जम्मू कश्मीर की हसीन वादियों से शुरू कर दुबई की तपती रेत तक भरपूर जिया. इतना जिया कि लोगों को उनकी शख्शियत पर रश्क होता. सुनंदा मूल रूप से कश्मीर के सोपोर जिले के बंमई गांव की रहने वाली थीं. 1 जनवरी 1962 को जन्म हुआ था. बाद में आतंकवाद की वजह से परिवार जम्मू आ गया. पिता पुष्कर नाथ दास आर्मी में लेफ्टीनेंट कर्नल रहे. सुनंदा का एक भाई सेना में उच्चाधिकारी है और दूसरा डॉक्टर है. खुद सुनंदा मीडिया की सुर्खियों में तब आर्इं, जब तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री रहे शशि थरूर के साथ उनकी शादी हुई. इससे पहले उन्हें कोई नहीं जानता था कि वे क्या हैं और क्या करती हैं. लेकिन दिल्ली की चमक और महत्वाकांक्षा की सीढ़ी ने जल्द ही सुनंदा को दिल्ली से दुबई तक की हाई प्रोफाइल सोसाइटियों में प्रसिद्धि दिलवा दी.

19 साल की उम्र में सुनंदा की कश्मीरी ब्राह्मण संजय रैना के साथ पहली शादी हुई थी. रैना उन दिनों दिल्ली के एक होटल में कार्यरत थे और सुनंदा भी एक होटल में रिसेप्शनिस्ट थीं, लेकिन दोनों का वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं गुजरा. वर्ष 1988 में दोनों का तलाक हो गया. आजाद ख्याल की सुनंदा ने वर्ष 1989 में दिल्ली का रुख कर लिया, जहां वह हाई प्रोफाइल पार्टियों की जान बन गर्इं, फिर एक रोज अपना जहां कहीं और तलाशने के लिए सुनंदा ने दुबई की फलाइट पकड़ ली और वहां 1991 में केरल के व्यवसायी सुजीत मेनन के साथ दूसरी शादी कर ली. इसके बाद दोनों ने कुछ लोगों के साथ मिलकर एक्सप्रेशंस नामक एक कंपनी बनाई, जो कई प्रोडक्ट लांच कराए और मॉडल हेमंत त्रिवेदी, विक्त्रम फड़नीस, ऐश्वर्या रॉय के साथ कई शो भी आयोजित किए. इसके बाद सुनंदा को एक बड़ी विज्ञापन कंपनी के साथ काम करने का मौका मिला. उनकी जिंदगी का यह सबसे अच्छा दौर था. दुबई में ही उन्होंने बेटे शिव को जन्म दिया. बला की खूबसूरत तो थी हीं सुनंदा, लोग उन्हें दुबई में ब्यूटीशियन के तौर पर भी जानते थे.

लेकिन 1997 में एक रोज करोलबाग दिल्ली में सुजीत मेनन की एक सड़क हादसे में मौत हो गई. शिव ने बोलना बंद कर दिया. तब वह चार साल का था. इलाज के लिए सुनंदा बेटे को कनाडा ले गर्इं और वहीं की एक आइटी कंपनी में नौकरी कर ली. 2004 में रियल स्टेट कंपनी ‘बेस्ट होम्स’ ने सुनंदा को मुडो दुबई में जनरल मैनेजर के तौर पर काम करने का प्रस्ताव मिला और वह कनाडा से फिर दुबई लौट आर्इं. तब तक उनके कई दोस्त पैसे वाले बन चुके थे. सुनंदा भी जुमेरिया पॉम के एक खूबसूरत अपार्टमेंट में रहने लगीं. बाद में एक फ्लैट जुमेरिया बीच और दो एक्जीक्यूटिव टॉवर में खरीदे. इस बीच दुबई के बिजनेस सर्किल में भी सुनंदा एक सफल नाम जाना जाने लगा. वहां की बेस्ड टेलीकॉम इंवेस्टमेंट कंपनी की वह सेल्स डायरेक्टर थीं और रेंदेवूज स्पोर्ट्स वर्ल्ड में को-वोनर भी इसके अलावा दिल्ली और मुंबई में भी उनका बिजनेस फैलने लगा.

2008 में सुनंदा इंपीरियल में हुए एक अवार्ड समारोह में शामिल होने दिल्ली आर्इं. यहां पहली बार उनकी मुलाकात शशि थरूर से हुई. दोनों दोस्त बन गए. मेल-मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया. केरल के पलक्कड़ जिले के प्रतिष्ठित थरूर परिवार से नाता रखने वाले शशि का जन्म लंदन में हुआ है. उस समय उनके पिता एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के अधिकारी थे. दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई करने वाले शशि की पहली शादी कोलकाता में 1977 में पत्रकार तिलोत्तमा मुखर्जी के साथ हुई थी. उन्होंने जुड़वा बेटों ईशान और कनिष्क को जन्म दिया. बाद में शशि ने पत्नी से तलाक ले लिया और संयुक्त राष्ट्र में अंडर सेके्रटरी जनरल की पोस्ट पर नियुक्त हो गए. वहां उनकी मुलाकात संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण आयोग की उप सचिव क्रिस्टा गिल्स से हुई. शशि कैनेडी युवती क्रिस्टा से मुहब्बत कर बैठे. वर्ष 2007 में दोनों ने शादी कर ली. पर यह रिश्ता भी बहुत ज्यादा नहीं चला. जनवरी 2010 में क्रिस्टा से शशि ने तलाक ले लिया और भारत लौट आए. कांग्रेस सरकार ने उन्हें विदेश राज्य मंत्री बना दिया. इसके बाद शशि और सुनंदा के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं. उनका प्रेम इतना गहरा गया कि अप्रैल 2010 में कोच्चि की इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) टीम को लेकर विवाद हुआ तो सुनंदा ने उस विवाद को खत्म करने के लिए 70 करोड़ रुपयों के इंवेस्टमेंट खुद के द्वारा किया जाने की बात स्वीकार कर ली और इसके बाद थुरूर ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

22 अगस्त 2010 में सुनंदा-शशि ने शादी कर ली. इसके बाद यह जोड़ी इतनी चर्चा में आई कि अक्तूबर 2012 में एक बयान के तहत नरेंद्र मोदी ने सुनंदा पुष्कर को ‘50 करोड़ की गर्ल फ्रेंड’ करार दिया और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नकवी ने थरूर को ‘लव गुरु’ की उपाधि दे डाली. उन्होंने कहा कि अगर देश में लव मंत्रालय बनता है तो उसका पदभार शशि थरूर को दिया जाना चाहिए. दिसंबर 2013 में सुनंदा एक बार फिर अपने बयान से चर्चा में आर्इं. उन्होंने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हुए कहा कि ‘संविधान के अनुच्छेद 370 की समीक्षा होनी चाहिए.’ लेकिन 15 जनवरी 2014 को अचानक सुनंदा और थरूर के रिश्ते पर तब सवाल उठ खड़े हुए, जब थरूर के ट्विटर अकाउंट से पाकिस्तान की पत्रकार मेहर तरार को किए गए कुछ ट्वीट सामने आए. थरूर ने ट्वीट किया कि उनका अकाउंट ‘हैक’ कर लिया गया है. मेहर ने भी शोसल मीडिया के जरिए किसी ‘संबंध’ होने से इनकार किया, फिर सूत्रों के मुताबिक, सुनंदा ने उसी रोज मेहर से फोन पर बात की. इसके बाद पति-पत्नी ने एक संयुक्त बयान जारी कर दावा किया कि उनका वैवाहिक जीवन सुख से बीत रहा है और वे चाहते हैं कि यह ऐसा ही रहे.

बात बिगड़ी, ट्विटरबाजी हुई, सुनंदा और मेहर दोनों ने मोर्चा संभाला और थरूर पर अपना-अपना दावा किया, लेकिन जिस तरह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुनंदा के शरीर पर 12 जख्मों के निशान मिले हैं उससे लगता है कि कहीं न कहीं सुनंदा को लग रहा था कि प्यार के इस त्रिकोण में वे बाजी हार रही हैं. बाद में यह बात भी सामने आई कि थरूर के मेहर के साथ कथित अफेयर से खफा सुनंदा ने लोधी रोड आवास के बजाय होटल में रहने का फैसला किया और 14 जनवरी को तिरुवनंतपुरम से दिल्ली आने के दौरान सुनंदा और थरूर के बीच फ्लाइट में और एयरपोर्ट पर भी हल्की झड़प और हाथापाई हुई थी. उसी का नतीजा है कि सुंनदा चाणक्यपुरी के होटल लीला में रहने अकेली पहुंचीं. अब होटल के कमरे से लेकर एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक जो बातें उभरकर सामने आ रही हैं, उससे हत्या जैसी बात तो कोरी बकवास के अलावा कुछ नहीं लगती. 21 जनवरी को मामले के जांच अधिकारी एसडीएम (बसंत विहार) आलोक शर्मा ने दंडाधिकारी को अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी. उसकी प्रति थाना सरोजनी नगर के एसएचओ को भी दी गई है. शर्मा ने इस मामले में 11 लोगों से पूछताछ की, जिसमें सुनंदा के भाई राजेश और आशीष पुष्कर, बेटे शिव मेनन, निजी सचिव आरके शर्मा, कंसल्टेंट शिव कुमार, अटेंडेंट नारायण, बजरंगी और उपचार करने वाले दो डॉक्टर शामिल हैं. इसके अलावा पुलिस ने वरिष्ठ पत्रकार नलिनी सिंह से भी पूछताछ की है.

सुनंदा के पारिवारिक मित्र जॉय कहते हैं, ‘‘सुनंदा की ख्वाहिश ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना और जमकर खर्च करना था. शाहखर्ची उनकी आदत बन चुकी थी. दुबई में ही सुनंदा की दोस्ती नंदकुमार राधाकृष्णन से हुई. नंदकुमार को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया. फिर उन्हीं के जरिए सुनंदा शशि थरूर के करीब आईं. इसके बाद ही दोनों ने मिलकर कई सारे निवेश किए.’’ नादिरा बताती हैं, ‘‘कुछ बीमारी के कारण डॉक्टरों ने सुनंदा को शराब का सख्त परहेज बताया था, लेकिन दिल्ली में सुनंदा बहुत ज्यादा तनाव में आ गई थीं. संभवत: वे अत्यधिक शराब पी रही थीं.’’ सफल बिजनेस वुमन होकर भी शायद सुनंदा पति को लेकर असुरक्षित महसूस करती थीं. उसकी दोस्त फराह अली खान कहती हैं, ‘‘किसी भी पब्लिक फंक्शन में वह थरूर के साथ इसी वजह से जरूर जाती थीं. अस्वस्थ होती थीं तो भी.’’

पुलिस को सुनंदा के कमरे से अल्प्राजोलम (अल्प्रैक्स) की दो खाली स्ट्रिप्स मिली थी. सुनंदा ने शायद 27 टेबलेट्स खाई थी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अल्प्राजोलम की ज्यादा मात्रा से दिमाग की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है. बेहोशी और मौत संभव है. देश के सबसे अनुभवी फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स डॉ. के.एल. शर्मा का कहना है, ‘‘सुनंदा की मौत के लिए जिस अल्प्रैक्स ड्रग के ओवरडोज की बात की जा रही है, उससे उनकी मौत संभव नहीं है जब तक कि उसे किसी और दवा के साथ मिलाकर नहीं लिया जाए. सुनंदा के वजन के बराबर इंसान की मौत तभी हो सकती है जब वह कम से कम 225 टैबलेट का एकसाथ सेवन कर ले.’’ डॉ. एन.पी. सिंह (प्रोफेसर मेडिसीन) कहते हैं, ‘‘दवा के ओवरडोज से किसी की मौत होना अविश्वनीय है. क्योंकि यदि व्यक्ति दवा के सामान्य डोज से 100 गुना अधिक डोज भी ले, तब भी समय से अस्पताल पहुंचाने पर उसकी जान बच जाती है.’’

सुनंदा की मौत के पीछे किसी साजिश के सवाल पर उनके घरवाले साफ इनकार कर रहे हैं. 21 वर्षीय बेटे शिव ने भी कहा है कि शशि थरूर और सुनंदा एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे. शशि उनकी मां को कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते. वहीं एसडीएम शर्मा को जांच में थरूर के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला और न ही पुलिस की तहकीकात किसी नतीजे पर पहुंची. 23 जनवरी को पुलिस कमिश्नर बी. एस. बस्सी ने इस केस की जांच क्राइम ब्रांच (रोहिणी के सेक्टर-18) को सौंप दी. ऐसे में इस सवाल का जवाब अब भी नहीं मिला है कि आखिर सुनंदा की जान गई कैसे? क्या वे यह मान बैठी थीं कि अब थरूर से उनका भावनात्मक संबंध खत्म हो जाएगा और उन्होंने आत्महत्या कर ली या फिर इस हारती बाजी (मेहर तरार की दरार) का इतना गहरा सदमा लगा कि सोते-सोते ही वे इस दुनिया को अलविदा कह गईं?

                                        मेहर तरार की वजह से पड़ी दरार


45 वर्षीय मेहर तरार भले ही सरहद पार की हैं, लेकिन भारत और सुनंदा थरूर की जिन्दगी में ये नाम काफी पहले दस्तक दे चुका था. जुलाई 2013 में मेहर ने शशि थरूर को मेल लिखा था. वह कुछ इस तरह है- आपकी जिंदगी में जो कुछ भी हो रहा है मुझे उसके लिए बहुत अफसोस है. मैं जानती हूं कि आपके लिए यह शादी क्या मायने रखती है. आपके लिए आपकी बीवी क्या मायने रखती है. मुझे लगता है कि आपने एक दूसरे थ्रेड में गलती से कुछ लिख दिया था. मैं शमिंर्दा हूं. पिछली रात मैंने इस पर मजाक बनाया था, क्योंकि मैं कुछ भी कहने से घबरा रही थी. हम दो बार मिले हैं. हम अच्छे दोस्त बन गए हैं. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और सच तो ये है कि आपकी दोस्त होना एक सम्मान की बात है.’’ इसका मतलब है कि दोनों के रिश्ते की खटास को जानती थीं मेहर. दूसरे ई-मेल में इस बात का उन्होंने जिक्र भी किया है, ‘‘मैं नहीं चाहती थी कि आप दोनों के बीच कोई तनाव हो. इंशाह अल्लाह आपके बीच सबकुछ ठीक हो जाए।’’ एक और मेल में मेहर लिखती हैं, ‘‘ मेरी वजह से आपकी अपनी पत्नी के साथ अनबन हो रही है. मैं क्या कहूं, मैं तो बिल्कुल भी सोचना तक नहीं चाहती हूं. मेरा बेटा बहुत छोटा है. महिला और पुरुष के रिश्तों को हमेशा शक से देखा जाता है. पता नहीं मेरे बेटे पर क्या असर पड़ेगा.’’ अंत में एक बयान में मेहर ने कहा है, ‘‘सुनंदा की शादीशुदा जिंदगी की परेशानी में मेरी कोई भूमिका नहीं थी. मैं इस मामले में साजिश का शिकार हुई हूं.’’

बुधवार, 8 जनवरी 2014

           शेखावटी में लगती है दुल्हनों की बोली !





झुंझनू, सीकर और चुरु में रुपये लेकर विवाह कराने वाले कई गिरोह सक्रिय हैं और देश के दूसरे राज्यों में भी इन्होंने अपना जाल फैला रखा है

जितेंद्र बच्चन

राजस्थान के शेखावटी का चौंकाने वाला सच! 21वीं सदी में भी यहां बेहिसाब बिकती हैं दुल्हनें! गलियों में, दुकानों में, गांवों में और शहरों में सजती है दुल्हनों की मंडी! कभी नौकरी के नाम पर, कभी शादी के नाम पर तो कभी-कभी घरों में काम करने वाली के नाम पर दूर-दराज के इलाकों से लड़कियों को यहां लाकर उनकी बोली लगाई जाती है. 50 हजार से शुरू होता है सौदा और तीन लाख तक पहुंच सकती है आखिरी बोली. महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और पंश्चिम बंगाल के छोटे-छोटे कस्बों और गांवों की लड़कियों की भेड़-बकरी की तरह होती है खरीद-फरोख्त. बालिग हो या नाबालिग, इस धंधे में लड़की की उम्र कभी आड़े नहीं आती. रकम पूरी मिलनी चाहिए, दलाल किसी भी लड़की को किसी भी उम्र और जाति के पुरुष की दुल्हन बनने पर मजबूर कर सकता है. सबसे खतरनाक तस्वीर झुंझुनू और सीकर की है, जहां रुपये लेकर विवाह कराने वाले कई गिरोह सक्रिय हैं और दूसरे राज्यों में भी उनके एजेंटों ने अपना पूरा जाल फैला रखा है.

दुल्हनों की इस खरीद-फरोख्त के काले कारोबार में राजस्थान पुलिस के कुछ अफसर भी शामिल बताए जाते हैं. अंतरराज्जीय गिरोह के लोग उन्हें बकायदा कमीशन देते हैं. तभी तो शेखावटी (झुंझुनू, सीकर और चुरु) में अब तक 5 हजार से ज्यादा दुल्हनें खरीदकर आ चुकी हैं. यह एक गैरसरकारी संस्था का आकड़ा है. रही बात सरकार और पुलिस की तो वह यह तो मानती है कि शेखावटी में दूसरे राज्यों से दुल्हनें लाई जाती हैं, लेकिन इसका कारण लिंगानुपात में कमी का होना बताया जाता है. जबकि हकीकत यह है कि यहां के तमाम कायदे-कानून दुल्हनों के दालल अपने ठेंगे पर रखते हैं. 27 दिसंबर 2013 को भी नानसा गेट (झुंझुनू) मुहल्ले में बिकने आई चार लड़कियों को पुलिस ने बरामद किया है. वाकया शाम करीब 7 बजे का है. एक युवक के साथ महाराष्ट्र की छह लड़कियां गली में घूम रही थीं. कुछ लोगों को उनके हाव-भाव पर शक हुआ. उन्होंने छिपी नजरों से पीछा करना शुरू कर दिया. युवक को अंदेशा हुआ तो वह और उसके साथ की दो लड़कियां फरार हो गए, लेकिन चार लड़कियों को लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.

पूछताछ में चारों लड़कियों का कहना था कि वे अमरावती महाराष्ट्र की रहने वाली हैं और यहां अपनी एक रिश्तेदार से मिलने आई हैं, मगर पूरा पता नहीं बता पार्इं. लोगों का कहना है कि लड़कियों को अमरावती से शादी के लिए यहां लाया गया था. मुहल्ले के कुछ कुंवारे लड़कों को उन्हें दिखाने के बाद उनकी बोली लगाई जानी थी. यह तो अच्छा हुआ कि पुलिस ने पहले ही पकड़ लिया वरना दलाल आसानी से इन लड़कियों को दुल्हन के नाम पर नीलाम कर देते. इससे पहले दिल्ली पुलिस भी एक मामले का खुलासा कर चुकी है. घटना 20 सितंबर 2013 की है. मौत से संघर्ष कर रही दो वर्षीय बच्ची फलक को एक युवती एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में दाखिल कराकर लापता हो गई. पूछने पर उसने खुद को बच्ची की मां बताया था, फिर वह लड़की को छोड़कर गायब क्यों हो गई? यह सवाल उठते ही अस्पताल प्रशासन ने थाना हौजखास के एसएचओ हरपाल सिंह को इत्तला की. उनकी जांच-पड़ताल पर पता चलाकि फलक की मां का नाम मुन्नी खातून है. वह मूल रूप से कटिहार बिहार की रहने वाली है. शराबी पति की पिटाई और आर्थिक तंगी से परेशान तीन बच्चों की मां मुन्नी एक रोज घर छोड़कर दिल्ली चली आई. उसके साथ उसकी छोटी बेटी फलक भी थी. यहां उसकी मुलाकात राजा गार्डेन की लक्ष्मी से हुई. वह लड़कियों को अपने जाल में फंसाकर उन्हें खरीदने-बेचने का धंधा करती है. उसका गिरोह राजस्थान में भी काम करता है. झुंझुनू की सरोज, कोटपुतली की कांता चौधरी और हरियाणा का शंकर लक्ष्मी के गिरोह के मेंबर हैं. ये लोग जरूरतमंद लड़कों को दुल्हन बेचने का काम करते हैं.

मुन्नी, लक्ष्मी और उसके गिरोह की असलियत जान नहीं पाई. लक्ष्मी ने पहले उसके प्रति सहानुभूति जताकर उसका दिल जीता, फिर तरह-तरह के सब्जबाग दिखाकर उसे दूसरी शादी करने के लिए राजी कर लिया. सरोज ने योजना के अनुसार झूठ बोलते हुए बताया कि भड़ौंदा में उसका भांजा हरपाल सिंह रहता है. अच्छा कमाता-खाता है. उसकी पत्नी की मौत हो चुकी है. कोई बच्चा नहीं है. तुम चाहो तो तुम्हारी शादी के लिए हम उससे बात कर सकते हैं. मासूम फलक का मुंह देखकर मुन्नी ने हामी भर दी. हरपाल के साथ उसकी शादी हो गई. सरोज ने हरपाल से मुन्नी का नाम अनीता बताया था. बाद में भेद खुला तो पता चला कि मुन्नी मुसलमान है. लक्ष्मी ने हरपाल से उसका एक लाख रुपये में सौदा किया है. हरपाल सरोज का भांजा नहीं बल्कि उसे एक दुल्हन की दरकार थी और वह किसी लड़की को खरीदना चाहता था. इसके लिए उसने गिरोह की एजेंट सरोज से संपर्क किया और सरोज ने लक्ष्मी और शंकर के साथ मिलकर मुन्नी उर्फ अनीता को हरपाल के हाथ बेच दिया.

हरपाल तब भी मस्त था, लेकन एक रोज जब पता चला कि मुन्नी ने नसबंदी करा रखी है और अब वह उसके बच्चे की मां नहीं बन सकती तो हरपाल एकदम से तिलमिला उठा- यह तो फरेब है! हमारे साथ धोखा किया गया है. मुन्नी ने सफाई देनी चाही तो हरपाल ने उसकी एक न सुनी और मार-पीटकर उसे घर से निकाल दिया. उसी लड़ाई-झगड़े में मासूम फलक गंभीर रूप से घायल हो गई. मुन्नी बेटी को लेकर दिल्ली चली आई. यहां लक्ष्मी की बड़ी लड़की ने फलक को एम्स में ले जाकर भर्ती करा दिया. सोचा था, मुन्नी अगर अस्पताल गई तो उसकी जुबान लड़खड़ा सकती है. किसी को असलियत पता चल गई तो उसके साथ-साथ वह भी पकड़ी जाएगी. पर हुआ यह कि लक्ष्मी की जो लड़की फलक को एम्स ले गई थी, वह अस्पताल से ही अपने प्रेमी के साथ भाग गई और थाना हौजखास पुलिस मां की तलाश करते-करते मुन्नी खातून तक जा पहुंची. इसके बाद सारे मामले का पर्दाफाश हो गया.

दिल्ली पुलिस ने आरोपी हरपाल सिंह, लक्ष्मी, सरोज, शंकर और फरेब करने के इल्जाम में मुन्नी को •ाी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि हरपाल सिंह के मामले में झुंझुनू के अमर सिंह ने दलाल की भूमिका निभाई थी. वह अब तक शेखावाटी क्षेत्र में 30-35 लड़कियों को शादी के लिए बेच चुका है. उसका संपर्क गिरोह की मेंबर कांता चौधरी से है, जो जयपुर राजस्थान की रहने वाली है. कांता के खिलाफ थाना बहरोड़ में 2, कोटपुतली में 2 और वानापुर में एक दुल्हन बेचने का मामला दर्ज है. इससे पहले एक बार थाना वसंत कुंज (दिल्ली) पुलिस कांता को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन जमानत पर छूटने के बाद वह फिर से इसी धंधे में उतर गई. अब पुलिस उसके साथ-साथ दलाल अमर सिंह को भी तलाश रही है.

शेखावटी में दलालों ने पूरा जाल बिछा रखा है. करीब दो साल से लड़कियों की खरीद-फरोख्त में लगे एक दलाल ने अपना नाम-पता न उजागर करने की शर्त पर बताया, ‘‘सबसे सस्ती दुल्हन की कीमत 50 हजार रुपये है. इसमें 35 हजार रुपये बाहर के एजेंट का होता है और 15 हजार रुपये हमारा. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनकी डिमांड एकदम अलग होती है. एक बार एक अधिकारी महोदय टकरा गए. उनका कहना था, ‘दुल्हन सुंदर और कमउम्र होनी चाहिए.’ ऐसी लड़की के लिए कम से कम दो लाख रुपये खर्च हो सकते हैं. एजेंट के माध्यम से लड़की मंगाई जाती है. कई बार लड़की के किसी नाते-रिश्तेदार को भी पटाने के लिए उसे रुपये देने पड़ते हैं. ग्राहक को मंदिर या किसी होटल में लड़की दिखाई जाती है. पसंद आने पर सौदा तय होता है, फिर पूरी रकम लेकर दोनों की शादी करा दी जाती है.’’

दलाल ऐसे बता रहा था जैसे किसी गाय-भैंस को बेचने की बात कर रहा हो. हमारे पूछने पर उसने इस पेशे से जुड़े कुछ और भी खुलासे किए. ‘‘जो ज्यादा पैसे वाले होते हैं, उनकी डिमांड वेल मेंनटेन लड़की की होती है. इसीलिए मुंहमांगी कीमत अदा करते हैं. ऐसी लड़कियां फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती हैं और कहीं भी जाने को तैयार होती हैं. यानी घर में दुल्हन और होटल में गर्लफे्रंड का बाखूबी रोल अदा करती हैं. इस तरह की लड़कियों की आपूर्ति हम दार्जिलिंग और शिलांग के एजेंटों के माध्यम से करते हैं. उन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं होती. असम की कुछ लड़कियां इतनी तेज-तर्रार होती हैं कि शादी के लिए खुद अपना सौदा करती हैं.’’

मुकुंदगढ़ थाना प्रभारी युसुफ अली के मुताबिक, पहली जून 2013 को एक मुखबिर की सूचना पर डूंडलोद (जिला झुंझुनू) निवासी सलीम को 14 वर्षीया लड़की को बंधक बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. मानव तस्करी निरोधक सेल झुंझुनू के प्रभारी अरविंद सिंह चारण ने जब उससे पूछताछ की तो पता चला कि लड़की मूल रूप से अमरावती महाराष्ट्र की रहने वाली है. करीब 10 दिन पहले सलीम उसे बहला-फुसलाकर लाया था. इस बीच एक रोज वह लड़की को लेकर सीकर गया और वहां के सुरेश ने उसे अपनी दुल्हन बनाने के लिए डेढ़ लाख में उसे खरीद लिया. एक लाख 10 हजार रुपये भी दे दिए. शेष रकम शादी के बाद देने को कहा था, लेकिन उसके पहले ही लड़की को हकीकत पता चल गई तो वह रोने लगी. उसने खाना-पानी छोड़ दिया. पुलिस ने सुरेश को भी गिरफ्तार कर लिया है. अदालत के आदेश पर दोनों आरोपी जेल में है और पीड़िता नारी निकेतन में रह रही है.

खुड़ाना के मुकेश और रोहतक की सुनीता को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. आरोप है कि सुनीता को मुकेश ने दुल्हन के लिए खरीदा था. शादी कराने वाले गिरोह ने मुकेश के परिजनों से लड़की को अविवाहित बताया था, जबकि सुनीता पहले से विवाहित है और उसका एक बच्चा भी है. सूत्र बताते हैं कि झुंझनू, सीकर और चुरु के 300 से अधिक गांवों में बंगलादेश की तमाम लड़कियां दुल्हन बनकर रह रही हैं. इन लड़कियों ने अपनी असलियत छिपाते हुए नाम और जाति बदलकर शादी की है. इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा है. चुरु के 65 वर्षीय बुजुर्ग मानिक चंद बताते हैं, ‘‘शेखावटी में लड़कियों की कमी है. भ्रूण हत्या के चलते यहां के लिंगानुपात में बहुत फर्क आया है. क्षेत्र की जो लड़कियां हैं, वे शिक्षा में अव्वल हैं और अधिकतर सरकारी नौकरी में हैं. इलाके के बेरोजगार और अशिक्षित युवकों के साथ यहां की लड़कियां शादी करने को कतई राजी नहीं होतीं. ऐसे में लड़के बिना शादी के बहुत दिन तक पड़े रहते हैं. गरीब तबके के जो लोग हैं, उनकी शादी 30-35 साल बाद भी नहीं होती. उन्हें दुल्हन मिलनी मुश्किल हो जाती है. ऐसे में शादी के लिए यहां के लोग दलालों के माध्यम से दूसरे राज्यों की लड़कियां खरीदते हैं. कुछ की घर-गृहस्थी अच्छी चल रही है, लेकिन कुछ परिवार इन बाहरी दुल्हनों की धोखाधड़ी के शिकार भी हुए हैं. कई घटनाओं में शादी के दूसरे रोज ही दुल्हन रु. और जेवरात लेकर भाग गई. इसमें दलालों की मिली•ागत होती है. पहले तो लड़केवालों को दलाल तरह-तरह के झांसे देते हैं. उसके बाद लड़की की जो कीमत लगती है, उसमें भी उनका मोटा कमीशन होता है. खासकर महिलाएं इस पेशे से ज्यादा जुड़ी हैं. पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ समाज को भी इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा, तभी ऐसी घटनाओं पर रोक लग पाएगी.’’

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा का दुल्हनों की खरीद-फरोख्त मामले में कहना है कि संबंधित पक्षों से रिपोर्ट मांगी गई है. राजस्थान पुलिस को आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए भी लिखा गया है. 6 जनवरी 2013 को फोन पर हुई बातचीत में झुंझनू के पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्रदीप का कहना है, ‘‘करीब पांच महीने पहले उन्होंने चार्ज लिया है. एक-दो मामले संज्ञान में आए हैं पर इसके पीछे की हकीकत यह है कि अधितर लोग पुलिस का सहयोग नहीं करते. उसके कई कारण हो सकते हैं. फिर भी हम तहकीकात करवा रहे हैं. अगर कहीं इस तरह का वाकया पेश आया है तो अवश्य कार्रवाई होगी.’’ दुल्हनों की खरीद-फरोख्त में कई थानेदारों की मिलीभगत के सवाल पर एसपी का कहना था, ‘‘अगर ऐसा है तो पीड़ित को हमसे संपर्क करना चाहिए. पुलिस का जो भी अफसर होगा, अगर वह गलत कार्यों में लिप्त है तो उसके खिलाफ मामला बनता है तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे.’’

सीकर के पुलिस अधीक्षक हैदर अली जैदी और चुरु के एसपी राहुल कोटोती भी इस बात को मानते हैं कि शेखावटी में दूसरे राज्यों की लड़कियां शादी के बाद यहां आई हैं. इन जिलों में लड़कियों की कमी है, इसलिए यहां के लोगों की उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड, पंजाब आदि राज्यों की लड़कियों के साथ शादी करना मजबूरी है. कुछ मामले दुल्हनों की खरीद-फरोख्त का भी पता चला है. उनकी एफआइआर दर्ज करवाने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है. किंतु दोनों में से कोई भी पक्ष तभी पुलिस के पास आता है, जब कोई मामला बिगड़ जाता है. कुछ ऐसे भी मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें शादी के बाद दुल्हन नकदी और जेवरात लेकर फरार हो गई. उन केसों की जांच चल रही है. हम भी यही चाहते हैं कि कार्रवाई हो और दुल्हनों की खरीद-फरोख्त पर पाबंदी लगे.

आरोपियों को तलाश रही पुलिस

14 नवंबर 2013 को झुंझुनू जिले के पचेरी थाना इलाके के पचेरी कलां गांव की एक दुल्हन शादी की पहली रात ही नकदी और जेवरात लेकर भाग गई. मामले के विवेचनाधिकारी सज्जन सिंह के अनुसार, मामले की तफ्तीश की जा रही है. पिचानवा गांव, चिड़ावा कस्बा जिला सीकर में भी सत्यवीर की दुल्हन शादी के 10 दिन बाद भाग गई. दुल्हन का नाम आरती था. सत्यवीर के घर वाले उसके मायके मथुरा पहुंचे. वहां पता चला कि आरती का नाम-पता सब फर्जी है. सत्यवीर और उसके घर वाले माथा पीटकर रह गए. झुंझुनू जिले के भेडकी गांव के महेश की दुल्हन बबीता भी शादी के 17 दिन बाद जेवरात आदि लेकर फरार हो गई. बाद में महेश की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बबीता को लुधियाना से गिरफ्तार कर लिया. उसका असली नाम सुखविंदर कौर है. उसे बबीता के नाम से महेश के साथ शादी करवाने वाले बाकरा गांव के पवन जाट को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. उसने दुल्हन के बदले में महेश से 1 लाख 20 हजार रुपये लिए थे. अब जेल में है.

चुरु जिले के थाना पिलानी पुलिस ने भी शादी के नाम पर ठगी करने का एक मामला दर्ज किया है. डुलानिया निवासी राजकुमार ने सूचना दी थी कि इंडोल (हिसार) के जितेंद्र, बूचावास (तारानगर) की सावित्री, रेवत और पदमपुर (गंगानगर) की पूजा ने 8 मई 2013 को उसके •ााई अमित की ज्योति नामक लड़की के साथ शादी कराने के लिए 1 लाख 30 हजार रुपये लिए थे. 12 मई को दोनों की शादी हो गई, लेकिन 13 मई की रात दुल्हन घर में रखे 60 हजार की नकदी और करीब 2 लाख के जेवरात लेकर फरार हो गई. पुलिस आरोपियों को तलाश रही है.

शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

58 दिन की पनाह

दो महीने कहां छिपा रहा नारायण सार्इं? किसने दी पनाह? कौन है मददगार? क्या उन पर भी होगी कार्रवाई?

पाखंड का टूटा तिलस्म. संत का चोला ओढ़कर लड़कियों की अस्मत से खेलने वाले का चेहरा बेनकाब. पांच लाख का इनामी भगोड़ा नारायण सार्इं गिरफ्तार. धर्म की आड़ में अधर्म के पाप का पर्दाफाश. पूरे 58 दिन यह शातिरदिमाग शख्स देश की पुलिस के लिए छलावा बना रहा. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब के बड़े-बड़े अधिकारियों को चकमा देता रहा. मामले की तफतीश में लगी गुजरात पुलिस भी गच्चा खा गई, लेकिन दिल्ली क्राइम ब्रांच के कुछ अफसरों की नजर अर्जुन की तरह सिर्फ और सिर्फ मछली की आंख पर लगी रही. तीर निशाने पर लगा और 3 दिसंबर 2013 की सर्द रात नारायण सार्इं पुलिस के हत्थे चढ़ गया.
6 अक्टूबर 2013 को थाना जहांगीरपुरा सूरत में दर्ज एफआइआर के मुताबिक, सूरत की दो बहनें कथावचक आसाराम के अहमदाबाद गुरुकुल और नारायण सार्इं के साबरकांठा जिले के गांभई आश्रम में साधक थीं. छोटी बहन का नारायण वर्ष 2002 से 2005 तक यौन शोषण करता रहा. इसकी जानकारी नारायण की मां लक्ष्मी देवी और बहन भारती को भी थी. दोनों को इस मामले में सह आरोपी बनाया गया है. पीड़ित को नारायण कई बार अपने साथ सूरत के जहांगीरपुरा, पटना, काठमांडू और मध्य प्रदेश के मेघनगर आश्रमों में भी ले गया और वहां उसके साथ रेप किया. जबकि बड़ी बहन को अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में आसाराम साल 2001 से 2007 के बीच अपना शिकार बनाता रहा. इसी आरोप में तीन महीने से आसाराम जोधपुर जेल में बंद है. अब सूरत पुलिस की डीसीपी शोभा भूतड़ा नारायण साईं के खिलाफ बलात्कार, यौन उत्पीड़न, पीड़ित को गैरकानूनी तरीके से बंद रखने और दो अन्य मामलों की जांच कर रही हैं.
एफआइआर की भनक लगते ही नारायण सार्इं घर से 6 लाख रुपये लेकर भूमिगत हो गया. अग्रिम जमानत की फिराक में था. पुलिस को नारायण की मां-बहन भी नहीं मिलीं. 7 अक्टूबर को  पुलिस आयुक्त (सूरत) राकेश अस्थाना ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर एस.बी.पी. सिंह से बात की. सिंह ने अपराध शाखा के तेज-तर्रार अधिकारियों अडिशनल सीपी (क्राइम ब्रांच) आर.एस. यादव, डीसीपी क्राइम ब्रांच (नार्थ) कुमार ज्ञानेश, एसीपी के.पी.एस. मल्होत्रा और अपराध शाखा रोहिणी सेक्टर 18 के कुछ इंस्पेक्टरों की एक मीटिंग बुलाई और नारायण सार्इं की तलाश शुरू कर दी गई. सूरत पुलिस की एक टीम भी आरोपी की टोह में दिल्ली गई. रोहिणी, नजफगढ़, जफरपुर कलां और रिंज रोड स्थित कई स्थानों पर छापा मारा गया पर आरोपी का कुछ पता नहीं चला. इस बीच डीसीपी भूतड़ा को जान से मारने की धमकी जरूर मिली. पुलिस को समझते देर नहीं लगी कि इश्तिहारी मुल्जिम बहुत शातिर है. वह देश छोड़कर भी भाग सकता है. उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया गया.
16 अक्टूबर को सूरत पुलिस की एक टीम ने फिर दिल्ली आकर नारायण के आश्रम में छापा मारा. 17 अक्टूबर को जयपुर (राजस्थान) और रतलाम (मध्य प्रदेश), 18 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), 19 अक्टूबर को दरभंगा (बिहार) और 25 अक्टूबर को बिरार (मुंबई) में दविश दी गई. डीसीपी ज्ञानेश, एसीपी मल्होत्रा और उनके मातहत भी नारायण की तलाश में दिल्ली एनसीआर की खाक छानते रहे.11 नवंबर को सूरत की संबंधित अदालत ने आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया. समझ में नहीं रहा था कि नारायण को जमीन निगल गई या आसमान. 2 दिसंबर को भी डीसीपी ज्ञानेश इसी उधेड़बुन में पड़े थे, तभी एक मुखबिर ने फोन पर बताया- ‘सर, नारायण लुधियान में है.’ ज्ञानेश की आंखों में चमक गई. उन्होंने फौरन एस.बी.पी. सिंह को रिपोर्ट की. इसके बाद अडिशनल सीपी यादव के नेतृत्व में 36 पुलिसकर्मियों की चार टीमें बनाकर लुधियाना (पंजाब) रवाना कर दी गर्इं. 3 दिसंबर की शाम होते-होते दिल्ली क्राइम ब्रांच के 20 और अधिकारी लुधियाना पहुंच गए. इससे पहले सूरत पुलिस की टीम भी चुकी थी.
संयुक्ति पुलिस टीम नेआॅपरेशन सार्इं के तहत लुधियाना के नारायण आश्रम में छापा मारा. वहां पता चला कि नारायण साहनेवाल के गौशाला में ठहरा है. उसके नजदीक ही पंजाब के उद्योगपति पंकज अग्निहोत्री की कोठी है. नारायण कई बार उनके यहां सिख भेष में आता-जाता रहा. क्राइम ब्रांच पुलिस ने पंकज के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस कि तो पक्खोवाल रोड, मॉडल टाउन, गिल रोड और दोराहा नहर के आसपास का एरिया पता चला. यह स्थान लुधियाना में नारायण आश्रम से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है और वहीं अग्निहोत्री का एक फार्म हाउस भी है. पुलिस वहां पहुंची तो ज्ञात हुआ कि अभी थोड़ी देर पहले ही नारायण फोर्ड ईको स्पोर्ट्स गाड़ी में एनएच-1 से दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है. गाड़ी का नंबर यूपी 15 बीएच 0035 है. डीसीपी ज्ञानेश ने दिल्ली से लुधियाना के बीच 332 किमी के रास्ते में राजपुरा, जीरकपुर, चंडीगढ़, अंबाला और मेरठ समेत आठ डाइवर्जनों पर 35 अफसरों की आठ टीमें तैनात कर दीं. रात करीब 10 बजे अंबाला डाइवर्जन पर एक ईको स्पोर्ट्स कार आती दिखाई दी. नारायण उसी में था. क्राइम ब्रांच की टीम ने उसका पीछा किया और कुरुक्षेत्र (हरियाणा) के पिपली गांव के पास पेट्रोल पंप पर आरोपी को धरदबोचा.
नारायण ने गिरफ्तारी के समय टी-शर्ट, पैंट, जैकेट और पहचान छिपाने के लिए लाल रंग की पगड़ी पहन रखी थी. उसके साथ उसका सुरक्षा अधिकारी और सहयोगी कौशल ठाकुर उर्फ हनुमान (एक लाख का इनामी मुल्जिम), ड्राइवर रमेश मल्होत्रा और जुवेनाइल कुक भी था. कुक निर्दोष लगा, उसे पुलिस ने छोड़ दिया. कार की तलाशी में 2.61 लाख रुपये नकद, 6 मोबाइल फोन, 129 सिमकार्ड, कुछ कपड़े, थोड़ी-सी जड़ी-बूटी, स्टोव, खाना बनाने के बर्तन, वियाग्रा और छह मोबाइल फोन बरामद हुए. पुलिस तीनों आरोपियों को अपराध शाखा रोहिणी सेक्टर 18 ले आई. यहां अधिकारियों ने पूछताछ शुरू की- ‘58 दिन कहां छिपे रहे? किसने पनाह दी? और कौन-कौन तुम्हारे गुनाह के साथी हैं?’ जवाब में नारायण मंद-मंद मुस्कुराता रहा, फिर प्रवचन देने लगा, ‘‘वर्दी का बेजा इस्तेमाल मत करो वरना तुम सभी पाप के भागीदार बनोगे. हम संत हैं, असत्य का सहारा नहीं लेते.’’ 4 दिसंबर 2013 को पुलिस ने 42 वर्षीय नारायण सार्इं, 29 वर्षीय कौशल और 27 वर्षीय रमेश को रोहिणी कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट धीरज मोर की अदालत में पेश किया. सूरत पुलिस ने सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर मांगा तो विरोध करते हुए नारायण सार्इं के वकील प्रदीप राणा ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को दुष्कर्म के मामले में फंसाया गया है. दलील दी कि नारायण सार्इं खुद कोर्ट में सरेंडर करने दिल्ली रहे थे, लेकिन क्राइम ब्रांच का कहना है कि नारायण नेपाल भागने की फिराक में था. अंत में अदालत ने तीनों आरोपियों को सूरत पुलिस को सौंप दिया.
हलचल से बातचीत करते हुए डीसीपी शोभा भूतड़ा ने बताया, ‘‘अब तक की जांच में पता चला है कि नारायण करीब 7 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का मालिक है. कई साधिकायों को वह अब तक खराब कर चुका है. उसने आश्रम में अश्लील जाल फैला रखा था. इसके सहयोगी मोहित से ऐसे कई एमएमएस मिले हैं, जिससे लगता है कि नारायण कुछ लोगों को ब्लैकमेल भी करता रहा है. सूरत की क्राइम ब्रांच इस मामले की अलग से जांच कर रही है.’’ वह आगे खुलासा करती हैं, ‘‘नारायण की पत्नी जानकी उर्फ शिल्पा ने बताया है कि यमुना नामक एक लड़की से नारायण का अवैध संबंध रहा. दोनों का एक बेटा भी है. इसीलिए उसने नारायण से दूरी बना ली और अब दोनों का तलाक का मामला इंदौर कोर्ट में चल रहा है.’’
वर्ष 2001 से 2005 की अवधि तक खुद को सार्इं का पर्सनल असिस्टेंट (पीए) बताने वाले महेंद्र चावला का कहना है कि दिल्ली की मोनिका अग्रवाल नारायण की पसंद की लड़कियां उसे मुहैया करवाती थी. नारायण का विशेष सहयोगी कौशल मूलरूप से दरभंगा बिहार का रहने वाला है, जो नारायण के सेक्स रैकेट का एक मजबूत स्तंभ है. नारायण के आश्रमों में दुष्कर्म, अवैध संबंध और महिलाओं को टॉर्चर करने की कई कहानियां दफन हैं. लड़की के लिएमलंग और कंडोम के लिएवस्तु आश्रम में कोड वर्ड था. अमीर और सुंदर लड़कियां नारायण की पहली पसंद हैं. कोई नई लड़की उसके लिए तैयार होती तो उसके लिएतिलक लगा लिया है कहा जाता और किसी नई लड़की को चुनने के लिएभोग तैयार हो गया है बताया जाता.
आगरा पुलिस के एक अधिकारी ने नाम छापने की शर्त पर बाताया कि 20 अक्टूबर 2013 को नारायण सार्इं छिपने के लिए वहां भी आया था. रामबाग निवासी लक्ष्मण सेवकानी आसाराम का भक्त है. नारायण उसके यहां रात भर रहा. उसका हुलिया बदला हुआ था. दाढ़ी-मूंछ और सिर के बाल साफ थे और भगवा वस्त्र धारण कर रखा था. दूसरे रोज नारायण कहां गया, लक्ष्मण को नहीं पता. सूत्रों की मानें तो नारायण का अगला पड़ाव राजस्थान का भतरपुर शहर था. यहां उसका एक रिश्तेदार रहता है. वह भी नारायण की बदली वेशभूषा देखकर हैरत में पड़ गया. भरतपुर का धनाढ्य और प्रभावशाली व्यक्ति है. पुलिस के पचड़े में पड़ने के लिए उसने नारायण साईं से हाथ जोड़ लिया. जयपुर के पुलिस कमिश्नर भूपेंद्र दत्त और फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नर .एस.चावला ने बताया कि उनके यहां भी जांच चल रही है कि क्या नारायण सार्इं यहां आया था और किसने उसे पनाह दी थी? सूरत क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सीएम कुंभानी को नारायण मामले में गिरफ्तार किया गया है. कुंभानी पर आरोप है कि उसने नारायण सार्इं को भागाने में उसकी मदद की और इसके लिए 5 करोड़ रुपये की घूस ली.
सूरत पुलिस के मुताबिक, आरोपी को पनाह देने के आरोप में 8 दिसंबर को फैजाबाद (उत्तर प्रदेश) निवासी दो लोगों- सत्य शिव प्रकाश और नीलकमल सुंदरम को हिरासत में लिया गया है. उत्तर प्रदेश के सीतापुर और ग्रेटर नोएडा, उत्तराखंड में हरिद्वार, गुजरात में बलसाड और दरभंगा बिहार में भी जांच चल रही है कि क्या नारायण वहां आया था. बहरहाल, इसमें दो राय नहीं कि नारायण का नेटवर्क बहुत मजबूत है. उसके समर्थन में कुछ लोग सारे मामले को एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए धरना-प्रदर्शन भी कर रहे हैं. इसी का नतीजा है कि करीब दो महीने तमाम कोशिशों के बावजूद देश की पुलिस नारायण का सुराग तक नहीं लगा पाई. अब पुलिस को इन सवालों के जवाब भी ढूंढने होंगे कि बरामद 129 सिमकार्ड किसके नाम पर हैं और नारायण को कैसे मिले? लड़कियों की सप्लाई करने वाली मोनिका कौन है? उसके बच्चे की मां यमुना कहां हैं और डीसीपी शोभा भूतड़ा को जान से मारने की धमकी किसने और क्यों दी?
कारोबारी की है कार
मेरठ आरटीओ कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने रेप के आरोपी और पांच लाख के इनामी नारायण सार्इं से जो कार बरामद की है, उसकी मालिक 70 , साकेत, मेरठ निवासी उद्योगपति अजय दीवान की पत्नी हैं. खुद अजय दीवान ग्रुप आॅफ इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर हैं. इन्हें आसाराम का समर्थक माना जाता है. नारायण की गिरफ्तारी के बाद से बिजनसमैन परिवार का कोई भी सदस्य घर पर नहीं मिला. दीवान के वकील विकास सोनी से संपर्क करने पर उन्होंने बताया, ‘‘अजय की मित्रता नारायण सार्इं के ड्राइवर हरियाणा निवासी रमेश से थी. उसे उन्होंने कुछ दिनों के लिए अपनी कार इस्तेमाल करने को दी थी. इसमें अजय और नेहा का कोई दोष नहीं है.’’ वहीं मोहल्लेवालों का कहना है कि फरारी के दौरान नारायण कुछ दिनों तक कंकरखेड़ा मेरठ स्थित आश्रम में रुका था. पुलिस को इसकी भनक लगी तो वह यहां से फरार हो गया.
बेहद शातिर है नारायण
‘‘नारायण बेहद शातिर है. पुलिस को गुमराह करने की उसने पूरी कोशिश की. उसके खिलाफ हमारे पास कई ठोस सबूत हैं. उसके दूसरे गुनाहों को भी पुलिस खंगाल रही है.’’

- राकेश अस्थाना, पुलिस आयुक्त, सूरत